- Hindi News
- बिहार झारखंड में आयुर्वेद होम्योपैथी कालेजों की भी किल्लत
बिहार-झारखंड में आयुर्वेद-होम्योपैथी कालेजों की भी किल्लत
बिहार-झारखंड में आयुर्वेद-होम्योपैथी कालेजों की भी किल्लत
नेशनल ब्यूरो. नई दिल्ली | बिहारमें सिर्फ एमबीबीएस और इंजीनियरिंग शिक्षा देने वाले संस्थानों की ही किल्लत नहीं है बल्कि आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी की पढ़ाई के लिए भी इन दोनों राज्यों के छात्र, दूसरों पर निर्भर हैं। वर्षों से इन राज्यों में आयुष की पढ़ाई के लिए सरकारी क्षेत्र में नए कालेज नहीं खुले। बिहार में तो कई पुराने आयुर्वेद कालेज ही बंद हो गए जबकि सरकारी नौकरियों में आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी के डाक्टरों को बराबरी का दर्जा हासिल है। हाल के वर्षों में आम लोगों के बीच भी इन चिकित्सा पद्धतियों का आकर्षण बढ़ा है। दोनों राज्यों के निजी कालेजों पर दाखिले के लिए दबाव रहता है। केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री एसवाई नायक के मुताबिक, बिहार में इन पद्धतियों के जरिए मेडिकल की शिक्षा देने वाले सिर्फ 27 कालेज हैं वहीं झारखंड में इनकी संख्या पांच हैं। राज्यमंत्री ने कालेजों का यह ब्योरा मंगलवार को राज्यसभा में दिया था। दूसरी ओर, झारखंड के साथ ही वजूद में आए उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में इनकी संख्या आठ-आठ है। हालांकि हिंदी पट्टी के दूसरे राज्यों की हालत भी इस मामले में खास अच्छी नहीं कही जा सकती। मसलन, मध्य प्रदेश में 41 और उत्तर प्रदेश में 47 कालेज हैं। महाराष्ट्र में देश के किसी भी राज्य की तुलना में सर्वाधिक 123 कालेज हैं। इनमें निजी क्षेत्र का बड़ा योगदान है।
शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय कई समूहों ने एलोपैथ के अलावा आयुष के कालेज भी खोले हैं। दक्षिण के राज्यों में कर्नाटक एक नंबर पर है, यहां 75 कालेज हैं। जाहिर है, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कालेजों में उन राज्यों के बच्चे ही अधिक दाखिला लेते हैं, जिन राज्यों में इन कालेजों की संख्या कम है। वैसे, इसकी एक वजह कम फीस भी है। कर्नाटक की तुलना में बिहार में आयुर्वेद की पढ़ाई अधिक महंगी है।