पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • बीमा में 49 फीसदी विदेशी निवेश का रास्ता साफ

बीमा में 49 फीसदी विदेशी निवेश का रास्ता साफ

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बीमाक्षेत्र में 49 फीसदी विदेशी निवेश जल्दी ही हकीकत में बदल सकता है। बीजेपी सांसद चंदन मित्रा की अध्यक्षता वाली राज्यसभा की प्रवर समिति ने इसकी सिफारिश की है। समिति की रिपोर्ट बुधवार को सदन में पेश की गई। इसके चार सदस्यों ने एफडीआई सीमा बढ़ाने के विरोध में अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। सरकार अगले हफ्ते सदन में विधेयक पेश कर सकती है। माना जा रहा है कि विदेशी निवेश सीमा बढ़ने से इस सेक्टर में 25,000 करोड़ रुपए का निवेश आएगा।

15 सदस्यीय समिति ने कुल 9 बैठकें कर 167 पन्नों की रिपोर्ट पेश की। समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव, जनता दल (यू् ) के केसी त्यागी सीपीएम के पी. राजीव और तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन ने एफडीआई की सीमा 49 फीसदी करने का विरोध किया है। इनका कहना है कि पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति ने एफडीआई सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से ठुकरा दिया था। अब उसे 49 फीसदी करने का कारण संतोषजनक नहीं है। प्रवर समिति का कार्यकाल बढ़ाकर 12 दिसंबर कर दिया गया था। इसकी पहली बैठक 4 सितंबर को हुई थी। उसके बाद दो सदस्य मुख्तार अब्बास नकवी तथा जेपी नड्डा के मंत्री यू् के बाद उनकी जगह बीपी सिंह बडनोर तथा आर. रामकृष्णन नए सदस्य बनाए गए। यूपीए के कार्यकाल में बीमा संशोधन विधेयक 2008 में राज्यसभा में पेश किया गया था। तब भाजपा समेत विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया था।

सत्ता में आने के बाद अब भाजपा खुद यह विधेयक लाना चाहती है। लेकिन इस बार उसे कांग्रेस समेत ज्यादातर विपक्षी दलों के विरोध का सामना करना पड़ा। इसके बाद इसे 14 अगस्त 2014 को प्रवर समिति को सौंप दिया गया था।

कांग्रेस के सुझाव शामिल, समर्थन की अड़चन दूर

मुख्यविपक्षी दल कांग्रेस ने एफडीआई के साथ पोर्टफोलियो निवेश (एफआईआई) को भी विदेश निवेश में शामिल करने का सुझाव दिया था। इसे मान लिया गया है। इस तरह कांग्रेस के समर्थन का रास्ता साफ हो गया है। राज्यसभा में पास होने के बाद बिल लोकसभा में पेश किया जाएगा। वहां बीजेपी बहुमत में है। इसलिए वहां बिल पास होने में दिक्कत नहीं आएगी।

प्रमुख सिफारिशें

{बीमाकंपनियों पर जुर्माना गलती की गंभीरता के आधार पर तय हो

{नियम की अपने-अपने तरीके से व्याख्या की गुंजाइश कम रहे

{स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की चुकता पूंजी 100 करोड़ रुपए हो

{कानून