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जीएसटी पर सहमति के आसार बढ़े

7 वर्ष पहले
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{वित्त मंत्री ने की राज्यों को 11,000 करोड़ देने की घोषणा {राज्यों के वित्त मंत्रियों से आज मिलेंगे अरुण जेटली

एजेंसी| नई दिल्ली

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) के मुआवजे के तौर पर राज्यों को इस साल 11,000 करोड़ रुपए देने की घोषणा की है। उनकी इस घोषणा के बाद गुरुवार को राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ जीएसटी पर उनकी होने वाली बैठक में ज्यादातर मुद्दों पर सहमति के आसार बढ़ गए हैं।

हालांकि कई मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं। बैठक में इन्हें दूर करने की कोशिश होगी। राज्य पेट्रोल, डीजल, शराब और तंबाकू को जीएसटी से बाहर रखना चाहते हैं, लेकिन केंद्र सरकार इन्हें भी शामिल करना चाहती है। जेटली ने लोकसभा में अनुपूरक मांगों पर चली बहस के जवाब में सीएसटी मुआवजा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री बनने के बाद वह कई मुख्यमंत्रियों से मिले। सबका कहना है कि सीएसटी मुआवजे पर उन्हें केंद्र पर भरोसा नहीं है। केंद्र पर राज्यों का करीब 33,000 करोड़ रुपए का सीएसटी मुआवजा बकाया है।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सीएसटी को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में इसे चार फीसदी से घटाकर दो फीसदी किया गया था। इससे राज्यों की कर कमाई घट गई। लेकिन 2020 से उन्हें इसका मुआवजा नहीं मिला है। इसलिए राज्य सरकारें मुआवजे को जीएसटी विधेयक में शामिल करना चाहती हैं। इससे पहले वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि बैठक में उन मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा जिन्हें अब तक राज्य उठाते रहे हैं।

केन्द्र जीएसटी को अपैल 2016 से लागू करने को ध्यान में रखकर काम कर रहा है। राज्यों को जीएसटी से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई पर भी विचार-विमर्श जारी है। राज्यों के साथ मतभेद दूर होने के बाद केन्द्र सरकार विधेयक पेश करने की तारीख घोषित करेगी। जीएसटी लागू होने के बाद केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सेवा शुल्क जैसे केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और राज्य स्तर पर वैट और स्थानीय कर इसके दायरे में जाएंगे।





यूपीए सरकार ने वर्ष 2011 में जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया था। लेकिन सदन भंग होने के साथ ही विधेयक भी अमान्य हो गया। मोदी सरकार को इसके लिए नया विधेयक पेश करना होगा।