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न्यायिक जवाबदेही विधेयक पर अभी और विचार विमर्श की जरूरत: केंद्र
उच्चन्यायपालिकाके जजों के खिलाफ दुर्व्यवहार और अक्षमता की शिकायतों की जांच की मौजूदा प्रणाली को बदलने संबंधी प्रस्ताव पर सरकार ने गुरुवार को ‘और विचार विमर्श’ की जरूरत बताते हुए संकेत दिए कि इस संबंध में विधेयक के निकट भविष्य में आने की संभावना नहीं है।
पिछली संप्रग सरकार द्वारा पेश किए गए न्यायिक मापदंड और जवाबदेही विधेयक का जिक्र करते हुए विधि मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने लोकसभा को बताया कि 15वीं लोकसभा भंग होने के कारण यह विधेयक स्वत: निरस्त हो गया था।
उन्होंने एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि संसद में विधेयक लाए जाने से पूर्व विभिन्न पक्षकारों द्वारा इस विषय पर अभी और विचार विमर्श की जरूरत है। इस विधेयक को मार्च 2012 में लोकसभा में पारित कर दिया गया था लेकिन न्यायपालिका और न्यायविदों के विरोध के चलते राज्यसभा में इस विधेयक में कुछ बदलाव किए गए थे। लेकिन यह विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं हो सका था। निरस्त हो चुके विधेयक में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के जजों के खिलाफ नागरिकों द्वारा कथित दुर्व्यवहार और अक्षमता के आधार पर की जाने वाली शिकायतों से निपटने के लिए एक व्यापक व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया था।