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सामाजिक सुरक्षा की व्यापक श्रम नियमावली जारी कर सकती है सरकार
केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने दी जानकारी
एजेंसी| नई दिल्ली
केंद्रीयश्रम एवं रोजगार मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने कहा है कि सरकार सामाजिक सुरक्षा से संबंधित सभी कानूनों को एक साथ लाने के लिए सामाजिक सुरक्षा पर एक व्यापक श्रम नियमावली जारी करने पर विचार कर रही है।
बंडारू ने कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम 1952 में प्रस्तावित संशोधनों पर त्रिपक्षीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह जानकारी दी। कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम 1952 में संशोधनों के लिए मुख्य प्रस्ताव इसमें शामिल होने की सीमा 20 कर्मचारियों से घटाकर 10 कर्मचारी करना है। इससे इसमें शामिल हो सके क्षेत्रों तक सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकेगा और एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने बताया कि अधिनियम में उद्योगों की अनुसूची पहले ही बढ़कर 182 हो चुकी है। सरकार का प्रस्ताव उद्योगों की अनुसूची को समाप्त करना तथा एक नकारात्मक सूची प्रस्तुत करना है। इसने सेंट्रल बोर्ड आफ ट्रस्टीज (सीबीटी) के आकार को भी घटाने का प्रस्ताव रखा है जिससे कि इसे एक सक्रिय निर्णय लेने का निकाय बनाया जा सके। अधिनियमों के संशोधनों का ब्यौरा देते हुए उन्होंने बताया कि विशेष अधिकार को हटाने के लिए संबंधित संस्थान के खिलाफ बकाया के आकलन को लेकर पांच वर्षों की एक अधिकतम समय-सीमा का प्रस्ताव रखा गया है। अधिनियम के अनुरूप वेतनों की परिभाषा को लेकर एक पता का भी प्रावधान रखा गया है। बैठक में सीटू, एटक, इंटक, बीएमसी, एआईसीसीटीयू, एचएमएस और टीयूसीसी जैसे प्रमुख मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। फिक्की. सीआईआई. पीएचडी. एसोचैम आदि जैसे महत्वपूर्ण उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी विचार-विमर्श में शामिल थे।
इस अवसर पर कई मंत्रालयों एवं नीति आयोग के अधिकारी भी उपस्थित थे। मजदूर संगठनों ने ईपीएफ के दायरे का विस्तार करने तथा अनुपालन के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के सरलीकरण के सरकार के प्रस्ताव का स्वागत किया। सीबीटी के आकार में कमी को लेकर नियोक्ताओं एवं कर्मचारियों दोनों ही पक्षों के बीच कुछ असहमति रही