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नक्सल इलाकों के पुलिस स्टेशनों में खुलेंगी राशन की दुकान

7 वर्ष पहले
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नक्सलसमस्यासे निपटने के लिए नई नीति बनाने में जुटी मोदी सरकार एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। इसके तहत राज्य सरकारें हामी भरे तो यहां के पुलिस थानों में राशन की दुकान या फिर प्राथमिक चिकित्सा के लिए डॉक्टर की तैनाती की जा सकती है।

मंत्रालय इस योजना को अपनी सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर चुका है। लेकिन वह चाहता है कि इसमें राज्य की भी सहभागिता हो। एक अधिकारी ने कहा कि नई नक्सल नीति में सिर्फ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की समर्पण राशि को बढ़ाने की जगह उनका दिल जीतने पर बल दिया जा रहा है। मोदी सरकार का मानना है कि मात्र ईनामी राशि बढ़ाने से ही यह समस्या हल नहीं होगी। शेषपेज|4





यहीवजह है कि उन्हें हर महीने राशन मिल पाए और समय से प्राथमिक चिकित्सा भी मिल पाए। इसके लिए ही ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं। एक कारण यह भी है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में बिना नक्सल संगठन की इजाजत के कोई भी राशन की दुकान नहीं खोलता है। अगर ऐसा करता है तो उसकी दुकान ज्यादा दिन चल नहीं पाती है। नक्सली उस पर हमला करके उसे बंद करा देते हैं या फिर दुकान खोलने वाले की हत्या कर देते हैं। इस डर की वजह से इन इलाकों में डॉक्टर भी नहीं जाते हैं। यहां के बच्चों को सरकारी नौकरी में अधिक अवसर देने पर भी मंथन किया जा रहा है। नई नक्सल नीति आने में अभी दो सप्ताह और लग सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका से आने के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह से चर्चा कर इस नीति को जारी करने की संभावना है।