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उपचुनाव: भाजपा के अच्छे दिन हवा हुए

7 वर्ष पहले
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नेशनल ब्यूरो/एजेंसी | नई दिल्ली/गांधीनगर/जयपुर

भाजपाकोनौ राज्यों की 32 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में सिर्फ 12 सीटें ही मिल पाई हैं। उसे और उसके सहयोगी अपना दल को 14 सीटों का नुकसान हुआ है। सबसे खराब हालत उत्तरप्रदेश में हुई। यहां लोकसभा चुनाव में उसने 80 में से 73 सीटें जीती थीं। लेकिन 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में सपा से आठ सीटें हार गई। यहां तक कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी और केंद्रीय मंत्री उमा भारती के झांसी संसदीय क्षेत्र में आने वाली विधानसभा सीटें भी गंवा दीं।

वाराणसी की रोहनियां सीट अपना दल के पास थी, जिसे वह कायम नहीं रख सकी। वहीं, झांसी की चरखारी सीट से खुद उमा भारती विधायक थीं। चार महीने पहले मोदी लहर में भाजपा ने राजस्थान और गुजरात में कांग्रेस को शून्य पर रोक दिया था। लेकिन दोनों राज्यों में कांग्रेस ने भाजपा से तीन-तीन विधानसभा सीटें छीनकर जबरदस्त वापसी की है। भाजपा के लिए राहत वाली खबरें सिलचर (असम) और बशीरघाट (बंगाल) से आई। वहां उसने कांग्रेस और तृणमूल से एक-एक सीट छीन ली। छत्तीसगढ़ की एक सीट के नतीजे 20 सितंबर को आएंगे।

शाहदूसरी नौकरी ढूंढें : कांग्रेस

कांग्रेसनेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘100 दिन के अंदर लोगों ने मोदी-मुक्त भारत बनाने के लिए वोटिंग शुरू कर दी है। अमित शाह को नई नौकरी तलाश लेनी चाहिए।’ उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, \\\"अच्छे दिन, अच्छी बात... अच्छे परिणाम गए।\\\'

Á महाराष्ट्र-हरियाणा में असर दिख सकता है। भाजपा से सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर शिवसेना अपनी शर्तें मनवा सकती है।

Á सपा-कांग्रेस का मनोबल बढ़ेगा। माहौल बनाने की कोशिश करेंगे कि जनता ने मोदी सरकार को नकार दिया है।

Á राजस्थान में वसुंधरा राजे और गुजरात में आनंदी बेन की कार्यशैली पर उठेंगे सवाल। इन्हें सीटें गंवाने पर जवाब देना मुश्किल होगा।

तीन राज्यों में क्यों मिली भाजपा को हार

गुजरात|नई सीएम पर अभी भरोसा कम

Áमोदीऔर अमित शाह के केंद्र में जाने से संगठन कमजोर हुआ है।

Áकार्यकर्ताओं-वोटरों का विश्वास नई सीएम आनंदी बेन पर कम।

राजस्थान|संगठन को नहीं मिली तवज्जो

Áटिकटबांटने में पार्टी को तवज्जो नहीं। वसुंधरा की मनमर्जी चली।

Áपिछले चुनावों के प्रदर्शन से नेता अति-आत्मविश्वास में गए थे।

Áसचिन पायलट के नेतृत्व म