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एफपीओ का समय कम करेगा सेबी

7 वर्ष पहले
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पूंजीबाजार नियामक सेबी फॉलोऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) की समय सीमा कम करने पर विचार कर रहा है। विभिन्न पक्षों की राय जानने के लिए एक परिचर्चा पत्र जारी किया जाएगा। सेबी चेयरमैन यूके सिन्हा ने यह जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें एफपीओ टाइमलाइन घटाने के लिए कई आवेदन मिले हैं। सिन्हा उद्योग चैंबर सीआईआई के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। एफपीओ की बात ऐसे समय उठी है जब सरकार कई पीएसयू में अपनी हिस्सेदारी घटाने की तैयारी कर रही है। एफपीओ और ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) इसके लिए सबसे मुफीद जरिया माना जाता है। सिन्हा ने कहा कि एफपीओ में रिटेल निवेशकों का 35 फीसदी कोटा कम करने का कोई विचार नहीं है। अगर कोई कंपनी खुदरा निवेशकों के लिए इससे ज्यादा शेयर आरक्षित करना चाहती है तो वह ऐसा कर सकती है।

इरादतनडिफॉल्टरों पर अंकुश के लिए दिशानिर्देश

सिन्हाने बताया कि जानबूझ कर डिफॉल्ट करने वालों पर अंकुश लगाने के लिए सेबी दिशानिर्देश तैयार कर रहा है। अभी ऐसी कंपनियों के पूंजी बाजार से फंड जुटाने पर कोई अंकुश नहीं है। सिन्हा ने कहा कि दिशानिर्देश में थोड़ा वक्त लगेगा। यूनाइटेड बैंक ने इसी महीने किंगफिशर एयरलाइंस, इसके प्रमोटर विजय माल्या और तीन निदेशकों को इरादतन डिफॉल्टर घोषित किया है। सरकार भी ऐसे लोगों और कंपनियों से निपटने के लिए बिल पर विचार कर रही है। इसमें संपत्ति कुर्क करने और प्रबंधन में बदलाव जैसे प्रावधान हो सकते हैं।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कदम

सिन्हाने कहा कि लिस्टेड कंपनियों के लिए बिजनेस और वैधानिक सूचनाओं को हर साल प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। सेबी जल्दी ही ऐसी व्यवस्था करने जा रहा है। इसे एनुअल इन्फॉर्मेशन मेमोरेंडम नाम दिया गया है। सेबी प्रमुख ने कहा कि इस व्यवस्था के बाद कंपनियां नियामकों की तरफ से अनावश्यक मुकदमों से बच सकेंगी। इस मेमो से कंपनियों को फंड जुटाने में भी आसानी होगी।