भागवत फिर बोले- भारत एक हिंदू राष्ट्र
राष्ट्रीयस्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने फिर कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है। देश के सभी हिंदुओं को एकजुट करना होगा। इसके लिए यह सही वक्त है। भागवत मेरठ और गाजियाबाद में आयोजित संघ की सभाओं को संबोधित कर रहे थे।
महान कवि रबीन्द्रनाथ ठाकुर की पंक्तियों का इस्तेमाल करते हुए भागवत ने कहा “जब भी हिंदुओं और मुस्लिमों में विवाद होगा, बीच का रास्ता भी सामने आएगा। वह रास्ता हिंदुत्व का होगा। देश को बड़ा बनाना है तो इसे संगठित करना होगा। हिंदू जगेंगे तो विश्व जगेगा, तभी मानव कल्याण होगा। हिंदुस्तान विश्व गुरु बनेगा तभी दुनिया में सुख और शांति का माहौल होगा। ऐसा परम वैभवशाली राष्ट्र बनाना संघ का लक्ष्य है। देश के लिए संगठित समाज संघ की कार्य पद्धति से संभव है। इसलिए संघ का हर स्वयं सेवक इस कार्य पद्धति को हर गांव बस्ती में पहुंचाने का संकल्प ले। खुद के आचरण में संघ के संस्कार लाए। यदि हम आपस में ही लड़ते रहेंगे तो संविधान हमें नहीं बचाने वाला।’
जैसा विरोध संघ का हुआ, वैसा किसी और का नहीं
भागवतने कहा ‘संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार के पास आर्थिक संसाधन नहीं थे। समाज को जोड़ने के लिए कोई आकर्षण नहीं था। इन विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने हिंदू समाज को संगठित करने के लिए शाखा शुरू की। दुनिया के इतिहास में किसी संगठन का किसी देश में इतना कटु विरोध नहीं हुआ, जितना संघ के कार्यकर्ताओं को सहना पड़ा। धैर्यपूर्वक सहकर भी संघ कार्यकर्ता आगे बढ़ते रहे। हम जो शाखा में करते हैं वह शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि शक्ति दर्शन है।’
समाजको संगठित करना होगा
भागवतने कहा, ‘समाज को संगठित कर वैभवशाली राष्ट्र निर्माण का लक्ष्य पाने की कार्यपद्धति हमारे पास है। चाणक्य के बाद का इतिहास हमें अहसास कराता है कि विदेशी आक्रांता के खिलाफ शिवाजी और महराणा प्रताप ने भी समाज को संगठित किया था। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान सभा में कहा था कि विदेशी आक्रांता की शक्ति से नहीं बल्कि देश के गद्दारों के कारण हम हारे। भाषा, जाति, पंथ का कोई विचार नहीं हो, ऐसा व्यवहार समाज में होना चाहिए।’