बस्तर के विकास को मिली नई राह
छत्तीसगढ़के बस्तर संभाग के सघन अंघेरे में अब रेल और सड़कों के जरिए विकास की रोशनी पहुंचेगी तो पोस्ट आफिस की पाती के साथ नौकरी करने का अवसर भी मिल सकेगा। यही स्थिति बैंकों में भी रहेगी। साथ ही, लोगों को पढ़ने-लिखने की सुविधाएं, रेडियो, टीवी और एफएम सुनने के अलावा मोबाइल के इस्तेमाल में भी आसानी होगी।
दरअसल, केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित अन्य राज्यों की बजाए छत्तीसगढ़ के लिए इसलिए सबसे ज्यादा प्रतिबद्धता दिखाई है क्योंकि देश में होने वाली घटनाओं में सबसे ज्यादा राज्य के 3 जिलों सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा में ही 20 प्रतिशत घटनाएं होती हैं। ऐसे में वर्षों से जो पहल नहीं हो सका था, वह मुख्यमंत्री रमन सिंह की मांग पर महज कुछ घंटों में ही हो गया और इससे बस्तर के विकास का एक नया मार्ग प्रशस्त हो गया है। देखा जाए तो यह पहली बार है कि केंद्र सरकार ने बस्तर की नक्सल समस्या को राष्ट्र के लिए गंभीर चुनौती माना। सरकार का मानना था कि यदि नक्सल समस्या का समाधान करना है तो उसकी शुरुआत बस्तर से ही करनी होगी।
यही कारण है कि केंद्र ने बैठक में क्षेत्र के विकास से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं के नियमों को शिथिल करते हुए रेल, सड़क, दूर संचार, सूचना प्रसारण मानव संसाधन विकास आदि के मंत्रीगणों को अपनी-अपनी योजनाओं पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए सिर्फ निर्देशित किया बल्कि उसके लिए एक मानीटरिंग की व्यवस्था की ताकि किसी भी वजह से फाइलों में दबी विकास की योजनाओं को अब जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाते हुए क्षेत्र के लोगों को सीधे उसका लाभ पहुंचाया जा सके।
बताया जा रहा है कि बस्तर के 3 जिलों सुकमा के लगभग 5-6 हजार किमी के क्षेत्रफल में करीब 600-700 माओवादी कैडर, बीजापुर के साढ़े 6 हजार क्षेत्रफल में 400 और दंतेवाड़ा के 3 हजार किमी के क्षेत्रफल में करीब 100 माओवादी कैडर मौजूद हैं। चूंकि इन जिलों की सीमाएं ओडिशा, तेलंगाना और महाराष्ट्र से लगे होने के कारण माओवादियों को छिपने का मौका मिलता रहता है। इसीलिए बैठक में इन राज्यों के प्रतिनिधियों को समन्वित प्रयास पर जोर दिया गया। बहरहाल, केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने का फायदा छत्तीसगढ़ के धुर नक्सली क्षेत्रों को मिलता दिख सकेगा क्योंकि वहां के स्थानीय युवकों को सिर्फ पोस्ट आफिस, बैंक की सुविधाएं मिलेंगी बल्कि उसमें नौकरी का अवसर भी मिलेगा। वहीं रेल और सड़क सुविधाओं के विकास के अलावा लोगों को लिखने-पढ़ने की सुख-सुविधाओं और आवासीय छात्रावासों के साथ-साथ बीएसएनएल के बंद पड़े 270 टावरों को तुरंत चालू होने, रेडियो, टीवी और एफएम से लोगों को काफी लाभ मिल सकता है।
केंद्र और राज्य के बीच सहमति वाले मुद्दों के प्रमुख बिन्दु -
- रेलमंत्री सुरेश प्रभु 13 फरवरी को दल्ली राजहरा से रावघाट रेल लाइन का एमओयू करेंगे।
- पोटा केबिन स्कूल का अब 8वीं कक्षा से 10वीं कक्षा तक विस्तार होगा।
- दंतेवाड़ा के 11 विकासखंडों में 500 सीटर आश्रम छात्रावास बनेंगे।
- 28 फरवरी से यूएवी (मानवरहित विमान) कैम्प भिलाई से प्रारंभ होगा।
- बस्तर के हर पंचायत में पोस्ट आफिस और बैंक शाखाएं खुलेंगी। इनमें स्थानीय लोगों की भर्ती होगी।
- बीएसएनएल के बंद पड़े 270 मोबाइल टावरों को तुरंत चालू किया जाएगा।
- रेडियो, टीवी नेटवर्क और एफएम का शत-प्रतिशत दायरा बढ़ाया जाएगा।
- पर्यावरण अनुमति का अधिकार 5 हेक्टेयर से बढ़ाकर 40 हेक्टेयर तक करने की मांग।
- बस्तर के आसपास 514 किमी सड़कों के साथ ही दो पुलों का भी निर्माण जल्द होगा।
- सड़क परिवहन मंत्रालय दो चरणों 6 और 11 हजार करोड़ के जरिए बिछाएगा सड़कों का जाल।
- आधुनिक तकनीक से फ्री कास्ट फैब्रिकेटेड पुल बनाए जाएंगे।
- दोड़नापाल से जगरगुंडा नेशनल हाइवे को अब खुद राज्य सरकार बनाएगी।
- सीआरपीएफ की बची 6 बटालियनें राज्य को जल्द ही मुहैया कराई जाएंगी।
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{मुख्यमंत्री रमन सिंह की मांग पर केंद्र सरकार ने दिखाई प्रतिबद्धता
{गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मंत्रालयों को योजनाओं पर त्वरित पहल के लिए दिए निर्देश