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डीएलएफ समेत 57 डेवलपर्स लौटाना चाहते हैं सेज

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली | डीएलएफऔर पार्श्वनाथ समेत 57 डेवलपर्स अपने सेज प्रोजेक्ट सरकार को लौटाने की गुजारिश की है। बोर्ड ऑफ अप्रूवल 20 फरवरी को इस पर फैसला करेगा। वाणिज्य सचिव राजीव खेर इस बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इन 57 में से 35 सेज आईटी-आईटीईएस सेक्टर के हैं। बाकी इंजीनियरिंग, बायोटेक, जेम्स एंड ज्वैलरी, फार्मा और टेक्सटाइल सेज हैं। पार्श्वनाथ को इंदौर में आईटी-आईटीईएस सेज विकसित करना था। इसे जुलाई 2007 में नोटिफाई किया गया था। लेकिन विकास आयुक्त के मुताबिक डेवलपर ने यहां कोई काम नहीं किया है। ही फिलहाल कुछ करने का इरादा है। आयुक्त ने इसी आधार पर नोटिफिकेशन रद्द करने की सिफारिश की है। डीएलएफ को नोएडा में सेज विकसित करना था। लेकिन वहां के विकास आयुक्त के मुताबिक कंपनी संभावित नुकसान को देखते हुए इसे तैयार नहीं कर रही है। एक समय सेज का काफी आकर्षण था। साल 2005-06 में देश के सेज से 22,840 करोड़ का निर्यात हुआ था। साल 2013-14 में यह बढ़कर 4.94 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

पहले सेज से होने वाला निर्यात पर कोई कर नहीं लगता था। लेकिन न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) और लाभांश कर (डीडीटी) लगाए जाने के बाद इनका आकर्षण कम हुआ है। उद्योग चैंबर सीआईआई ने अगले बजट में सेट पर मैट घटाकर 10 फीसदी करने की सिफारिश की है ताकि इनमें निवेश हो सके।