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चुनावी मैनेजमेंट के साथ तकनीक में भी नंबर वन, ड्रोन से रखी भीड़ पर नजर

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी ने नई किस्म की राजनीति की शुरुआत कर अविश्वसनीय जीत तो हासिल की ही, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की भी नजीर कायम की है। मंगलवार को पार्टी की जीत के बाद कार्यकर्ताओं की भीड़ जब जश्न में डूबी थी तो कुछ कार्यकर्ता ड्रोन से ​भीड़ पर नजर जमाए थे।
आप कार्यकर्ताओं में इंजीनियरिंग और एमबीए के छात्रों की पर्याप्त संख्या है,जो एजुकेटेड होने के साथ आधुनिक तकनीक से लैस हैं। पार्टी के पास भले ही अन्य पार्टियों के मुकाबले ज्यादा संसाधन न हों, लेकिन उच्च शिक्षण संस्थानों से आए उसके कार्यकर्ता नई-नई तकनीकों के सहारे काम आसान कर लेते हैं।

दिल्ली में वोटिंग के कुछ दिन पहले आप नेता योगेंद्र यादव का रोड शो निकला तो कुछ कार्यकर्ता वॉकी-टॉकी से लैस थे और इसकी मदद से भीड़ का मैनेजमेंट कर रहे थे। इस बारे में योगेंद्र ने कहा- नई पार्टी है, हमारे पास उतने पैसे नहीं हैं। हमारे युवा धीरे-धीरे सीख रहे हैं। हमारा संगठन अपने तरीके से मजबूत हो रहा है।
एनआरआई को भी जोड़ा
आम आदमी पार्टी के गठन के बाद विदेशों में बसे भारतीयों ने मतदाताओं को फोन कर केजरीवाल के लिए समर्थन मांगा। यह इस चुनाव में भी देखा गया। हाल ही में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने आरोप भी लगाया था आप के समर्थन में पाकिस्तान और बांग्लादेश से फोन आ रहे हैं। पार्टी देश के विरोधियों से भी मदद ले रही है। पार्टी के अन्य राज्यों के कार्यकर्ताओं ने भी लाखों की संख्या में दिल्ली के वोटरों को फोन कर समर्थन मांगा।
ड्रोन से बरसाए फूल
केजरीवाल 30 जनवरी को रोहताश नगर में एक सभा करने पहुंचे तो उनपर ड्रोन से फूल बरसाए गए थे। कुछ समर्थकों ने इसकी व्यवस्था की थी। उनके स्वागत में ड्रोन ने दो बार उड़ान भरी। हालांकि ड्रोन की अनुमति को लेकर विवाद हुआ तो प्रशासन ने ड्रोन से फूल बरसाने की बात से इनकार कर दिया।
आंदोलन में सोशल मीडिया का इस्तेमाल
अन्ना ने जब पहली बार अनशन किया था तो टीम के सदस्यों ने मोबाइल संदेश भेजकर लोगों से समर्थन मांगा था। अनशन की सूचना के संदेश मोबाइल पर खूब वायरल हुए थे। आंदोलन के वक्त अरविंद के सहयोगियों ने पहली बार सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल किया और लोगों तक पहुंच बनाई।
फेसबुक, ट्विटर एवं अन्य सोशल मीडिया वेबसाइट्स के जरिये कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में लोगों को खुद से जोड़ा। पार्टी की रणनीति रही कि तकनीक के सहारे कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों से संपर्क किया जाए। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी ब्रिगेड भी सोशल मीडिया पर खूब सक्रिय रही, लेकिन नये प्रयोगों के मामले में आप ने बाजी मार ली।