नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनावों में अपने सफाये को लेकर कांग्रेस पार्टी के अंदर गुरुवार को सिर फुटव्वल शुरू हो गई। वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित ने पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार अजय माकन पर हमला बोला और पार्टी ने उनसे चुप रहने को कहा। पराजय को लेकर पार्टी नेताओं में तलवारें खींच गयी हैं। कांग्रेस में दिल्ली मामलों के प्रभारी पीसी चाको और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस क मेटी के अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली माकन का जमकर बचाव करने उतरे।
दीक्षित ने पार्टी में अपने युवा विरोधी पर प्रहार करते हुए कहा, ‘मुझे उन पर तरस आता है। अजय माकन ने सोचा कि वह सब कुछ खुद कर लेंगे। उन्होंने किसी और को शामिल नहीं किया। जाहिर है कि उनके तौर तरीके से कांग्रेस पार्टी को मदद नहीं मिली।’
कांग्रेस की अभूतपूर्व शिकस्त पर पूर्व मुख्यमंत्री दीक्षित ने कहा कि पार्टी को जितनी जोर से और गर्व के साथ अपनी 15 साल की सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने उठाना था, वह पार्टी नहीं कर पाई। शीला ने कहा, हमारी कमजोरी यह रही कि इतनी बड़ी जंग में पूरी तैयारी से नहीं उतरे, हम ठीक से काउंटर नहीं कर पाए। उन्होंने कांग्रेस के प्रचार अभियान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि इसमें कांग्रेस के सभी नेताओं को साथ नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी के प्रचार अभियान में वह शामिल होतीं तो स्थिति कुछ और होती।
शीला चुनाव के दौरान केवल सोनिया गांधी की एकमात्र रैली के दिन मंच पर नजर आईं, इसके अलावा उनकी एक भी जनसभा दिल्ली में आयोजित नहीं की गई। उन्होंने कहा कि मुझे पार्टी ने केवल एक दिन बुलाया और मैं वहां गई। उन्होंने कहा कि अजय माकन पार्टी की चुनाव प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष थे लेकिन प्रचार के दौरान ऐसा संदेश नहीं गया कि कांग्रेस का प्रचार हो रहा है।
पार्टी की प्रचार के लिए कोई रणनीति नहीं थी और शायद इसी वजह से पार्टी का मनोबल टूट गया। उन्होंने तिकोने चुनाव में आवाम को बदलाव के लिए एक विकल्प मिल गया। पिछले चुनाव में भी यही हुआ। उसके बाद एक साल तक दिल्ली में खालीपन था, हमें जनता को अपना काम याद दिलाना चाहिए था।
हालांकि पार्टी की हार के लिए शीला ने सब को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इस अवधारणा को गलत बताया कि पार्टी दिल्ली में खत्म हो चुकी है। पिछले चुनाव में भी हमारे ऊपर सीडब्ल्यूजी में घोटाले के नाम लांछन लगाकर जनता को गुमराह किया गया।
क्या आज भी मैं या मेरी सरकार का कोई साथी जेल गया, किसी जांच में किसी का नाम आया? जिस पार्टी ने 15 साल शासन किया, वह एक साल में ध्वस्त नहीं हो सकती, पार्टी फिर से खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने भविष्य को लेकर चिंतन करना होगा और अतीत से सबक लेने होंगे। हमें अवाम से संपर्क बनाए रखना चाहिए, 15 साल के कामकाज को मजबूती के साथ उठाना चाहिए।
लवली बोले, पार्टी की हार के कारणों पर मंथन करेंगे
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कहा है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के कारणों का आंकलन किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में गुरुवार को संवाददाताओं से बातचीत में लवली ने कहा कि दिल्ली विधानसभा के चुनाव में पार्टी की स्थिति पर विचार विमर्श किया जाएगा और यह पता लगाया जाएगा कि कहां कमियां और खामियां रह गईं। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं और दिल्ली की जनता का आभार करते हुए कहा कि कांग्रेस राजधानी के लोगों के फैसले का स्वागत करती है।
पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बहुत मेहनत की और प्रचार के दौरान सक्रियता से काम किया। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बयान के बारे में पूछे जाने पर लवली ने कहा कि वह उनसे मुलाकात कर इस बारे में पूछेंगे। उन्होंने कहा, ‘पार्टी की तरफ से मैंने 400 बैठकें कीं और हाईकमान की तरफ से छह रैली-रोड शो आयोजित किए गए।
ऐसे में चुनाव प्रचार में कहां कमी रह गई इस बारे में कहना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि स्वयं दीक्षित ने भी चार-पांच बैठकों में हिस्सा लिया था। नयी सरकार को कांग्रेस की तरफ से पूरे सहयोग का वादा करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वह रचनात्मक सहयोग करते रहेंगे।
दिल्ली में कांग्रेस को फिर से मजबूत करने का जिक्र करते हुए लवली ने कहा कि वह संगठन का गठन करेंगे और राजधानी के लोगों का फिर से विश्वास हासिल करने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर सक्रिय करेंगे।
इस्तीफे का मन बना रहे माकन
चुनाव में कांग्रेस का चेहरा बनकर उतरे पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बयान से काफी आहत हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक शीला के बयान से दुखी होकर अब वह पार्टी से इस्तीफा देने तक पर विचार कर रहे हैं। माकन के अलावा भी कुछ और नेताओं के माथे पर शीला के बयान ने शिकन पैदा कर दी है। शीला के बयान के बाद कांग्रेस के कई नेताओं के सुर बदले हुए दिखाई दिए हैं।
पार्टी नेता पीसी चाको ने कहा है कि यदि इस दौरान चुनाव में शीला दीक्षित भी होतीं तो वह चुनाव परिणामों को नहीं बदल सकती थीं। उन्होंने कहा कि अब समय है कि जब एक दूसरे पर आरोप लगाने की बजाए हम पार्टी को मजबूत करने पर काम करें। उधर, कांग्रेस के एक अन्य नेता मुकेश शर्मा ने कहा कि माकन की तो इस बात के लिए तारीफ की जानी चाहिए कि उन्होंने ऐसे समय में पार्टी से चुनाव लड़ने का तय किया। जब पहले से ही उसके खिलाफ विपरीत माहौल बना हुआ था।