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  • यात्री बढ़ रहे लेकिन एयरलाइंस डूब रहीं

यात्री बढ़ने के बाद भी डूब रही हैं एयरलाइंस, सस्ते टिकट बनी कंपनियों की परेशानी

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. भारत में यात्रियों की संख्या बढ़ने के बावजदू भी एयरलाइन कंपनियों के लिए कब्रगाह साबित हो रहा है। स्पाइसजेट का बिजनेस संकट इसका ताजा उदाहरण है। डीजीसीए के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से अक्टूबर 2014 के दौरान कुल यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले 8.61 फीसदी अधिक रही। वर्ष 2014 में 5.5 करोड़ लोगों ने सफर किया जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 5.07 करोड़ थी।
वहीं सितंबर से अक्टूबर 2014 की तुलना में एयर इंडिया, एयर कोस्टा, एयर एशिया के ग्राहकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। जबकि जेट एयरवेज, स्पाइसजेट, गो एयर और इंडिगो के पैसेंजर लोड फैक्टर में कमी दर्ज की गई है।

फिर भी देश और विश्व बाजार में मौजूद कंपनियां भारत में विस्तार और कारोबार शुरू करने की तैयारी कर रहीं हैं। इसकी प्रमुख वजह है लंबे समय तक देश के एयर ट्रैफिक में 10% से अधिक की तेजी की संभावना और वर्ष 2012 में पहली बार एयरलाइन कंपनियों को 49% तक विदेशी निवेश की सरकार द्वारा दी गई मंजूरी।
फिक्की और केपीएमजी की इंडियन एविएशन 2014 रिपोर्ट के मुताबकि देश में अभी भी 99.5 फीसदी आबादी एयरलाइन से दूर है, ऐसे में बहुत बड़ा उपभोक्ता वर्ग ऐसा है जो एविएशन से जुड़ने को तैयार है। रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ने और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरने से भी ग्रोथ होगी। इस क्षेत्र में वर्ष 2017 तक रोजगार की संख्या 1.17 लाख होने की उम्मीद है।
जो वर्ष 2011 में 62 हजार थी। 2020 तक भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा बाजार हो जाएगा। इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (आईसीएओ) के पूर्व रिप्रजेंटेटिव डॉ. सनत कौल ने कहा कि वर्ष 2030 तक देश के एविएशन ट्रैफिक में 10 फीसदी से अधिक की तेजी बनी रहेगी। सिर्फ भारत और एशियन मार्केट में ही ट्रैफिक ग्रोथ दहाई में है।
वहीं स्टार एयर कंसल्टेंसी के चेयरमैन हर्षवर्धन ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहली बार वर्ष 2012 में विदेशी एयर लाइंस के लिए एफडीआई लिमिट 49 फीसदी की है जिसके कारण विदेशी कंपनियां निवेश में रुचि ले रहीं हैं।
इंडिगो ने अक्टूबर 2014 में एयरक्राफ्ट निर्माता कंपनी एयर बस से 250 नये विमान का सौदा किया। सात वर्ष का यह सौदा 25 अरब डॉलर (1.5 लाख करोड़ रुपये) का हुआ है। टाटा संस, मलेशियन एयर एशिया बरहाद और टेलेस्ट्रा ट्रेडप्लेस की ज्वाइंट वेंचर कंपनी एयर एशिया ने इसी वर्ष बिजनेस शुरू किया है। वहीं टाटा संस और सिंगापुर की सिंगापुर एयरलाइंस की साझेदारी वाली विस्तारा भी जल्द सेवा शुरू करेगी। इसके अलावा लिगारे एविएशन लि., क्विकजेट कारगो एयरलाइंस को भी एयर ऑपरेटर्स परमिट मिला है।
यह पहला मौका नहीं है जब कोई कंपनी संकट में आई हो। 18 साल में स्पाइसजेट ऐसी सातवीं प्रमुख कंपनी है। स्पाइसजेट में 60 पायलटों ने एक साथ नौकरी छोड़ी है। एक साथ नौकरी छोड़ने का यह पहला मामला है।
हालांकि एयर एशिया-विस्तारा के आने, इंडिगो के एक्सपांशन प्लान के चलते इन पायलटों को भविष्य का संकट नहीं है। डीजीसीए द्वारा एक माह तक की टिकट बुकिंग की पाबंदी के बाद डायनमिक प्राइसिंग सिस्टम के कारण कंपनी के टिकिट सस्ते में बिक रहे हैं।
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