नौसिखिया सरकार के कामकाज पर विपक्ष का वार, सहयोगी भी दे रहे हैं नसीहत

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की नई-नई सरकार की सरकारी कामकाज व नियम कानूनों की नाजानकारी पर विपक्ष ने मंगलवार को विधानसभा में हल्ला बोल दिया। विपक्षी भाजपा ही नहीं, सरकार के सहयोगी कांग्रेस ने भी उन्हें नसीहतें दीं। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही पहली बार चुनकर आए दिल्ली विधानसभा के स्पीकर मनिंदर सिंह धीर को भाजपा के अनुभवी विधायकों ने घेर लिया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को उप-राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश करने का मौका दिया। इस पर भाजपा के विधायक बिफर उठे, उनका कहना था कि यदि सदन में प्रश्नकाल नहीं होना है तो स्पीकर को सबसे पहले विधायकों 280 के तहत विशेष उल्लेख और ध्यानाकर्षण के मामले उठाने का वक्त देना चाहिए था।


भाजपा के विधायक विधानसभा की कार्यवाही के नियमों का उल्लेख करके चिल्ला रहे थे कि स्पीकर ने तो पद की गरिमा ही खत्म कर दी। करीब 10-15 मिनट के हो-हल्ले के दौरान भाजपा विधायक ने यह मुद्दा भी उठाया कि विधि मंत्री सदन में अपनी पार्टी की टोपी पहनकर आ जाते हैं। एक विधायक इस परिसर में झाड़ू लगाकर ई-रिक्शा लेकर आ रहा है। जबकि यह समस्त परिसर स्पीकर के अधीन आता है, उन्हें तत्काल प्रभाव से इस पर अंकुश लगाना चाहिए। इन बातों पर स्पीकर महज इतना ही बोल पा रहे थे कि मैं आपसे रिक्वेस्ट कर रहा हूं प्लीज आप बैठ जाइए। आप शांत होंगे तो मुझे कुछ बोलने का मौका मिलेगा। जैसे ही उन्हें मौका मिला तो वह बोले कि सदन के अंदर उनका अधिकार है, बाहर कौन क्या कर रहा है, उस पर वह कुछ नहीं कर सकते। इस पर विधायक एक बार फिर उन पर टूट पड़े कि \'ठीक है फिर जब हम परिसर में धरना प्रदर्शन करें तो आप हमें रोकिएगा नहीं।\' फिर स्पीकर अपनी बात संभालते हुए बस इतना कह पाए कि ठीक है मैं बाहर भी देखता हूं। स्पीकर को अधिकारों का आइना दिखाने में भाजपा ही नहीं कांग्रेस भी पीछे नहीं रही।


कई बिंदुओं पर कांग्रेस के विधायकों ने भी खड़े होकर उन्हें सुझाव दिए कि फलां बिंदू पर उनके पास क्या-क्या करने का विकल्प व हक है। विपक्ष की ओर से यह भी कहा जाता रहा कि धन्यवाद प्रस्ताव पर एक दिन नहीं बल्कि कई-कई दिनों तक चर्चा होती है और सभी विधायकों को अपनी बात कहने का वक्त मिलता है। इस पर अपने सचिवालय की मदद से स्पीकर ने तुरंत सदन को जानकारी दी कि हर विधानसभा के पहले अभिभाषण में चर्चा के लिए एक ही दिन का वक्त दिया गया था। हालांकि भाजपा इससे संतुष्ट नहीं हुई और उन्होंने सदन का वॉकआउट भी किया।


हंगामे के बाद भाजपा की ओर से प्रो. जगदीश मुखी ने कहा कि आप सरकार के मंत्री व विधायक जिस तरह का दुव्र्यवहार कर रहे हैं उससे जो अराजकता पैदा होगी, उसके लिए खुद अरविंद केजरीवाल ही व्यक्तिगत जिम्मेदार होंगे। उन्होंने तमाम वायदों पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार बिना सोचे-समझे इस तरह के फैसले ले रही है। कांग्रेस विधायक दल के नेता हारुन युसुफ ने कहा कि किस पर बोलूं और क्या बोलूं। इस अभिभाषण में न स्पष्ट दिशा हैं और न ही कोई समझ। महंगाई कम करने का कोई रोडमैप नहीं है।  विकास योजनाओं की गति को बरकरार रखने का कोई खाका नहीं है। विशेष सुरक्षा दल पर भी स्पष्टता की जरूरत है क्योंकि पुलिस दिल्ली सरकार के अधीन नहीं है।