नई दिल्ली. असली जनादेश तो यही है। दिल्ली की जनता ने मानो
केजरीवाल से कह दिया- आप चाहते थे ना कि आपको पूर्ण बहुमत मिले। पांच साल का मौका मिले। लो दिया। अब दिखाओ काम करके। वाकई। ये अकल्पनीय जनादेश है। न आम आदमी पार्टी ने ऐसी जीत की कल्पना की थी। न भाजपा को ऐसी हार की आशंका होगी। और न ही कांग्रेस ने कभी शून्य सोचा होगा।
सन् 1991 में दिल्ली को केंद्र शासित राज्य घोषित किया गया। जिसके बाद दिल्ली को अपनी विधानसभा मिली।
ऐसा पहली बार हुआ जब दोनों बड़ी राष्ट्रीय दलों के सीएम उम्मीदवार चुनाव हार गए। कांग्रेस के तो तीसरे नंबर पर पहुंच गए। यह भी पहली बार हुआ कि 129 साल पुरानी कांग्रेस के 63 नेता जमानत गंवा बैठे। और ऐसा पहली बार ही हुआ जब 13 साल से अजेय मानी जा रही मोदी-शाह की जोड़ी मटियामेट हो गई।
14 फरवरी 2014 को जिस गर्वोक्ति के साथ केजरीवाल ने इस्तीफा दिया था, अब उसी गर्व के साथ 14 फरवरी 2015 को शपथ लेंगे। बहरहाल, मोदी की स्वघोषित प्रचंड हवा से धूज रहे नीतीश-लालू, मुलायम, ममता सरीखे नेताओं की बांछे खिल गई हैं। वे ये सोचकर खुश हैं कि अपने राज्यों में चुनाव से पहले हवा का रुख बदल गया है।
आप: 54% वोट मिले, यानी हर दूसरा वोट आम आदमी पार्टी को
139% सीटें बढ़ीं। 24% वोट शेयर बढ़ा पिछले विस चुनाव से। आम चुनाव में 33% वोट।
31 सीटें मिलीं जो 2013 में भाजपा के पास थीं। कांग्रेस की 7 सीटों पर भी कब्जा जमाया।
आगे क्या
>केजरीवाल व केंद्र सरकार के बीच रस्साकशी तय।
>आप के वादे 1 लाख करोड़ के, पैसे कहां से आएंगे?
>इस साल बिहार, अगले साल बंगाल चुनाव में
अरविंद केजरीवाल
का असर रहेगा।
विपक्ष के नाम पर सिर्फ ये तीन
जगदीश प्रधान- मुस्तफाबाद सीट से कांग्रेस के हसन अहमद को 6031 वोट से हराया।
ओपी शर्मा- विश्वास नगर सीट पर कब्जा। आप के अतुल गुप्ता को 10158 से हराया।
विजेंद्र गुप्ता- रोहिणी सीट से 5367 वोट से जीते। यह भाजपा की पारंपरिक सीट है।
इस बार हर पार्टी की मुराद पूरी।
आप: हमारी सरकार बने। भाजपा: कांग्रेसमुक्त दिल्ली। कांग्रेस: भाजपा काे सत्ता न मिले।
नतीजों के बाद सब सक्रिय
>मोदी का केजरीवाल को फोन। दोनों में पहली बार बात हुई। मोदी ने बधाई दी और चाय पर बुलाया। केजरीवाल ने हामी भरी।
>केजरीवाल ने गृह मंत्री, राष्ट्रपति को फोन लगाया। मिलने का वक्त मांगा। मंजूरी मिली। दिल्ली पुलिस पर अधिकार को लेकर करेंगे बात।
>शाम को केजरीवाल ने विधायकों संग मीटिंग की। वे नेता चुने गए। 14 को रामलीला मैदान में शपथ होगी। मोदी को भी बुलावा भेजा।
>अन्ना ने केजरीवाल को बधाई दी। कहा- अब ड्रामा मत करना। किरण के बारे में बोले- बेदी नहीं हारी, मोदी हारे हैं।
भाजपा: 225 से ज्यादा रैली, सीटें तीन
>24 मंत्री, 120 सांसद, 50 नेता, पीएम, अध्यक्ष मैदान में उतरे।
>91% सीटें गंवा बैठे फिर भी। 14 महीने में ही हुआ ये हाल।
>57 सीटों पर बढ़त गंवाई। आम चुनाव में 60 सीटों पर बढ़त थी।
>62 सीटों पर नंबर-टू रही
मैं हारी नहीं हूं। हार के बारे में जानना है तो भाजपा से पूछो।
- किरण बेदी
कांग्रेस: 70 में से 63 की जमानत जब्त
>100% सीटें कम हुई 14 माह में। जबकि 79% सीटें कम हुई थी आम चुनाव में। यानी 129 साल का सबसे खराब प्रदर्शन।
>15% गिरा वोट कम हुए पिछले विस चुनाव की तुलना में। सीएम दावेदार माकन की जमानत जब्त।
मैं जिम्मेदारी लेता हूं। महासचिव पद से भी इस्तीफा देता हूं। - अजय
आगे की स्लाइड्स में देखिए जीत के आंकड़े।