नई दिल्ली. स्कूलों में छोटे बच्चों के साथ घटती आपराधिक वारदातों पर रोक के लिए दिल्ली नगर निगम ने स्कूलों में सीसीटीवी (क्लोज सर्किट कैमरा टेलीविजन) लगवाने की योजना बनाई है। इसके लिए जल्द ही निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। इसके अलावा प्राइमर स्तर के स्कूलों में निगम स्कूल इंस्पेक्टर अब रूटीन विजिट के अलावा भी औचक दौरे करेंगे। जिससे स्कूल प्रबंधन हमेशा चौकन्ना रहेगा।
दरअसल हाल ही में दिल्ली के रोहिणी में ढाई साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न का मामला प्रकाश में आने के बाद अगले ही दिन हरिनगर के एक स्कूल में तीन साल की बच्ची के साथ स्कूल मालिक के बेटे द्वारा दुष्कर्म करने की घटना ने दिल्ली को झकझोर कर रख दिया। इसे लेकर अभिभावकों ने शुक्रवार को जमकर हंगामा किया। पाक्सो एक्ट के तहत उचित कार्रवाई करने का पुलिसिया आश्वासन मिलने के बाद ही लोगों का गुस्सा शांत हुआ।
इन घटनाओं ने दिल्ली के स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। घर से स्कूल भेजने वाले अभिभावक भी तब तक बेचैन ही रहते हैं, जब तक बच्चा घर नहीं लौट आता। उत्तरी और पूर्वी दिल्ली नगर निगम के प्रेस एवं सूचना निदेशक वाईएस मान बताते हैं कि कुछ साल पहले सरकार ने नगर निगम स्कूलों में आपराधिक वारदातों पर रोक लग सके, उसके लिए स्कूलों की चारदीवारी ऊंची करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद स्कूलों में एक ही प्रवेश द्वार हो, यह नियम बनाया था। लेकिन हाल में हुई आपराधिक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए निगम ने स्कूलों के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगवाने का निर्णय लिया है।
योजना के तहत जल्द ही सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए निविदाएं होंगी। इसके अलावा स्कूलों में छात्रों को स्कूलों में गुड टच, बैड टच के बारे में शिक्षक और काउंसलरों द्वारा बताया जाएगा। स्कूल इंस्पेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वह सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में शिक्षण और सुरक्षा व्यवस्था का रूटीन दौरा करने के अलावा औचक निरीक्षण भी करें। फिलहाल जिन स्कूलों में यह वारदात हुई है, उन स्कूलों में घटना की जांच जारी है। जांच के बाद अगर स्कूल प्रशासन के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
पेरेंट्स-छात्र और छात्र-शिक्षक के बीच संवाद जरूरी
प्राइमरी स्कूलों में अक्सर छोटे बच्चे और शिक्षकों के बीच और बच्चे व अभिभावक के बीच संवाद की कमी देखने को मिलती है। इसी कारण अपराध को बढ़ावा मिलता है। स्कूलों में शिक्षक को बच्चे से उसकी समस्या के बारे में जरूर पूछना चाहिए। बच्चा अगर परेशान है तो उसे टालने की बजाए, उसे सुनें और उसकी समस्या पर ध्यान दें। यही बात अभिभावकों पर भी लागू होती है। जरूरी यह भी है कि बच्चे की समस्या को लेकर अभिभावक स्कूल प्रबंधन और शिक्षक से बात करें। स्कूलों में बच्चों की काउंसलिंग की व्यवस्था भी हो। इसके अलावा जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी तो भाजपा अक्सर हमें टारगेट करती थी। लेकिन अब सत्ता में भाजपा है, दिल्ली नगर निगम के अलावा सुरक्षा व्यवस्था भी इन्हीं के जिम्मे हैं फिर ऐसी घटनाओं पर क्यों नहीं रोक लग रही? अरविंदर सिंह लवली, कांग्रेस, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष
जीरो परसेंट टोलरेंस और कड़ी सजा से रुकेंगे अपराध
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस होना चाहिए। अगर कोई बच्चों के साथ इस प्रकार की घिनौनी हरकत करता है तो उसे सख्त सजा दी जानी जाए, जो दूसरों के लिए नजीर बने। क्योंकि इस तरह की विकृत मानसिकता के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई जरूरी है। फिलहाल ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए हम स्कूलों में महिला काउंसलर नियुक्त हों और बच्चों के परिवार के साथ शिक्षकों का इंटरेक्शन बढ़े, इस दिशा में नए नियम जारी कर व्यवस्था बनवाएंगे।
सतीश उपाध्याय, भाजपा, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष
स्कूलों को अभिभावक दें प्राइवेट स्कूल कैब की जानकारी
अगर आप प्राइवेट स्कूल कैब से अपने बच्चे को स्कूल भेजते हैं तो जरा रुकिए और सोचिए कि प्राइवेट स्कूल कैब चालक या कैब हेल्पर बच्चों से सही व्यवहार करता है या नहीं? अगर भविष्य में आपकी बच्ची के साथ दुर्व्यवहार हुआ तो कौन जिम्मेदार होगा? क्योंकि इन प्राइवेट स्कूल कैब चालकों का पुलिस वेरिफिकेशन अभिभावक नहीं करते हैं। छात्रों की सुरक्षा के लिए शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने यहां बच्चों को छोड़ने के लिए आने वाली प्राइवेट स्कूल कैब का डेटा जिला उपशिक्षा निदेशक के कार्यालय में जमा कराएंगे। जिससे यह रिकॉर्ड दिल्ली पुलिस को भेजा जाएगा। खास बात यह है कि अभिभावकों की ओर से भी स्कूल प्रबंधक को यह जानकारी दी जाएगी कि फलां कैब नंबर में उनका बच्चा स्कूल जाता-आता है और ड्राइवर व हेल्पर का नाम यह है। यह डेटा एक माह के अंदर हर स्कूल को जिला उपशिक्षा निदेशक को सौंपना है। दिल्ली की अतिरिक्त शिक्षा निदेशक मधु रानी तेवतिया की ओर से जारी निर्देश में साफ किया गया है कि छात्रों की सुरक्षा को लेकर गृह मंत्रालय और परिवहन विभाग में हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है।
इस बारे में स्कूलों को पहले भी आगाह किया गया है। लेकिन हाल ही में स्कूली बच्चों के साथ आपराधिक घटनाओं में कैब चालक की भूमिका भी सामने आ रही है। इसलिए सभी स्कूलों को यह निर्देश है कि वह अपने यहां आने वाली स्कूल कैब का वेरिफिकेशन कराएं। साथ ही सरकारी, गैर सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल अपने यहां इन कैब चालकों का एक डेटा तैयार करें। इसके लिए निदेशालय की ओर से एक फार्मेट भी जारी किया गया है, जिसके आधार पर कैब चालक व हेल्पर का डेटा मेनटेन करना है। इसमें स्कूल का नाम और आईडी, प्राइवेट वाहनों की संख्या, वाहनों के नंबर, ड्राइवर का नाम, घर का पता, हेल्पर का नाम, घर का पता और उनकी कार्यप्रणाली को लेकर टिप्पणी इस फार्मेट में भरना है। जोन और जिला स्तर पर तैयार इस डेटा की सॉफ्ट कॉपी बनाकर दिल्ली पुलिस को भेजी जाएगी। जिससे पुलिस अपने स्तर पर आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए कार्रवाई कर सकेगी।
इसके अलावा सभी स्कूल प्रबंधकों से यह भी कहा गया है कि वह अभिभावकों से पेरेंट्स मीटिंग कर छात्रों की सुरक्षा पर बात करें। क्योंकि यह महत्वपूर्ण मुद्दा है।
अगर उनका
बच्चा स्कूल या ट्यूशन किसी वाहन से जाता है तो वह वाहन और वाहन चालक का सुरक्षा के लिए लिहाज से पुलिस वेरीफिकेशन कराएं। क्योंकि इस तरह की जागरूकता से ही अपराध पर नियंत्रण होगा और कैब चालक अपनी जिम्मेदारी को ज्यादा गंभीरता से लेंगे।
बच्चों की सुरक्षा के लिए याचिका
दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका में केंद्र को राजधानी में स्कूली बच्चों के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए मानदंड निर्धारित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है, राजधानी में स्कूल जा रहे बच्चों की सुरक्षा दांव पर है और उनके खिलाफ हो रहे इस तरह के अपराधों के तथ्यों के बावजूद सरकार और लोक प्राधिकारियों का मौन सवालों के घेरे में है।
स्कूल जाने वाले बच्चों का कैब चालकों और बस चालकों द्वारा उत्पीड़न किए जाने की हालिया घटनाओं को रेखांकित करते हुए याचिकाकर्ता नंदिता धर ने कहा कि केंद्र को इन बच्चों का यौन उत्पीड़न रोकने के लिए कुछ निर्देश देने चािहए।
निर्धारित करने चाहिए। उन्होंने बच्चों के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए सभी स्कूल बसों और स्कूल वैन को जीपीएस प्रणाली और सीसीटीवी कैमरों से लैस करने का सुझाव भी दिया।