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केंद्र सरकार ने कहा- विदेशी पटाखे बेचना और अपने पास रखना दोनों गुनाह

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. चीनी पटाखों की तस्करी की शिकायतों पर सरकार ने कहा है कि विदेशी पटाखे भारत लाना अवैध है। इन्हें बेचना या अपने पास रखना गुनाह है। इसके लिए सजा भी हो सकती है। इससे पहले, मद्रास हाईकोर्ट ने चार दिन पहले ही देश में चीनी पटाखों की तस्करी और बिक्री की जांच सीबीआई से कराने के आदेश दिए हैं।

तमिलनाडु फायरवर्क्स और अमोर्सिस मैन्युफेक्चर्स एसोसिएशन ने चीनी पटाखों की तस्करी का मुद्दा वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमन के सामने उठाया था। एसोसिएशन का दावा है कि विदेश में बने पटाखे बड़ी संख्या में तस्करी से भारत लाए जा चुके हैं।
इन्हें दीवाली के मौके पर खुदरा दुकानों पर बेचे जाने की आशंका है। उनका यह भी कहना है कि चीनी पटाखों में पोटेशियम क्लोरेट शामिल होता है। यह खतरनाक है। इसमें तेजी से आग लग सकती है या विस्फोट हो सकता है। इस पर केंद्र ने लोगों से अपील की है कि विदेशी पटाखे बिकते पाए गए तो वह इसकी सूचना पास के पुलिस थाने में कर सकते हैं।

2002 से प्रतिबंधित है विदेशी पटाखों की बिक्री: डायरेक्टर ऑफ फॉरेन ट्रेड ने 2002 में कस्टम विभाग को सर्कुलर जारी कर कहा था कि चीनी पटाखों को विस्फोटक वस्तु की श्रेणी में लिया जाए। विस्फोटक वस्तुओं के लिए पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन ने 2008 में विस्फोटक नियम बनाए थे। जिसके तहत पटाखों के इम्पोर्ट के लिए एक भी लाइसेंस नहीं दिया गया है। वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि 2011 से 2014 के बीच वह 23 बार चीनी पटाखे जब्त कर चुका है।

तस्करी रोकने में नाकाम है कस्टम: मद्रास हाईकोर्ट को कस्टम विभाग ने बताया कि उनके पास इतने संसाधन नहीं है कि वह हर कंटेनर को जांचें। तूतीकोरिन पोर्ट पर आने वाले 500 में से सिर्फ 20 कंटेनर की ही जांच हो पाती है। पिछले महीने शिवाकासी में जब्त चीनी पटाखे भी तूतीकोरिन से ही वहां तक पहुंचे थे। जो मुंबई से होकर पूरे देश में बिकने के लिए जाने वाले थे। कुछ समय पहले नोएडा में 600 कंटेनर पकड़े गए थे, जो नेपाल के रास्ते भारत आए थे।
600 करोड़ का है चीनी पटाखों का कारोबार
सस्ते चीनी पटाखों का कारोबार बढ़कर 600 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। तमिलनाडु फायरवर्क्स एसोसिएशन का दावा है कि दीवाली के लिए चीनी पटाखों को अवैध तरीके से भारत लाया गया है। उत्तर भारतीय शहरों में जमाखोरी की गई है। इसका असर भारतीय पटाखा उद्योग में लगे 10 लाख कर्मचारियों पर पड़ रहा है। कारोबार भी 35% तक घटा है।

समुद्री और नेपाल के रास्ते हो रही है तस्करी
शिवाकासी के एक शख्स मुत्थुकृष्णन ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच में जनहित याचिका लगाई थी। जिस पर कोर्ट ने गुरुवार को माना कि चीनी पटाखों की तस्करी समुद्री और नेपाल के रास्ते हो रही है। तमिलनाडु पुलिस की जांच सीमित रहेगी। इसलिए सीबीआई मामले की जांच करे।