नई दिल्ली. दिल्ली का बीकानेर हाउस 63 साल बाद 17 अक्टूबर तक केंद्र सरकार के कब्जे से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। केंद्र सरकार ने बोरिया बिस्तर समेटना शुरू भी कर दिया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि कुछ दफ्तर खाली करा लिए गए हैं। बचे हुए दफ्तर भी जल्द ही दूसरी जगह शिफ्ट हो जाएंगे।
लुटियंस जोन में इंडिया गेट से चंद कदम दूर है बीकानेर हाउस। राजस्थान सरकार ने पिछले साल इस पर दावेदारी ठोंकते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उस वक्त बीकानेर हाउस का बड़ा हिस्सा (एक लाख 20 हजार वर्गफुट) केंद्र सरकार के पास था। एक-दो दिन से नहीं बल्कि 1951 से। केंद्र सरकार के दस दफ्तर चल रहे थे। अब कुछ दफ्तर खाली करा लिए गए हैं। लेकिन कैबिनेट सचिव, जू डेवलपमेंट अथॉरिटी जैसे दफ्तर अब भी वहीं हैं।
राजस्थान सरकार का राज्य पथ परिवहन निगम भी वहीं से राज्य के विभिन्न शहरों के लिए लग्जरी बस सेवा मुहैया करा रहा है। राज्य सरकार के वकील डॉ. मनीष सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार कहता तो है, लेकिन बीकानेर हाउस खाली नहीं करता। अब भी उसके पास एक बड़ा हिस्सा केंद्र के कब्जे में है।
उदयपुर हाउस पर भी है विवाद
राजस्थान सरकार ने बीकानेर हाउस के साथ ही दिल्ली के उदयपुर हाउस पर भी दावा किया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में राजस्थान ने दावा किया है कि उदयपुर हाउस दिल्ली सरकार के कब्जे में है। उसने खाली तो कर दिया है, लेकिन राजस्थान के हवाले नहीं किया है। उदयपुर हाउस तीस हजारी कोर्ट के पास करीब 12 हजार वर्गमीटर में फैला है।