नई दिल्ली । योजना आयोग को भंग करने को लेकर शनिवार को दो मुख्यमंत्रियों के बीच ठन गई। ये मुख्यमंत्री थे उत्तराखंड के हरीश रावत और महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस। रावत कांग्रेस और फडणवीस भारतीय जनता पार्टी से हैं। कांग्रेस सीएम ने योजना आयोग को भंग करने की आलोचना करते हुए कहा कि इससे देश में अनिश्चितता का माहौल बना है। इसका विरोध करते हुए भाजपा सीएम ने दलील दी कि नई संस्था के गठन से राज्यों को ज्यादा अधिकार मिलेंगे।
फडणवीस की दलील
सरकार एक सतत प्रक्रिया है। नई संस्था का गठन होने तक आयोग बना रहेगा। मोदी लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे। विपक्ष में भी थे। केंद्र-राज्य रिश्तों की मुश्किलों को अनुभव किया है। वह इस रिश्ते को मजबूत बनाना चाहते हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जब एक संस्था दूसरी की जगह लेती है तो वह अच्छे के लिए होता है। पूर्व प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह ने भी आयोग की भूमिका को नाकाफी कहा था और बड़े बदलाव की वकालत की थी।
हरीश रावत के तर्क
योजना आयोग जैसे संस्थान जांचे-परखे हुए हैं। संघीय ढांचे में आयोग ने राज्यों के साथ न्याय का प्रयास किया है। एकमत विकल्प मिलने तक इसे भंग नहीं करना चाहिए। सिर्फ यह कहना काफी नहीं कि विचार चल रहा है। क्योंकि बीते छह महीने से अनिश्चितता है जो देश के लिए ठीक नहीं।
नरेंद्र मोदी ने फैसला करने से पहले किसी राजनीतिक दल या मुख्यमंत्री से चर्चा तक नहीं की। यह जनमत पर अपने विचार थोपने जैसा था।