नई दिल्ली. लावारिस, घर से भाग कर अपराध करने वाले दिल्ली के 16 किशोर गृहों में रहने वाले बच्चों को आधार कार्ड देकर उन्हें पहचान दी जाएगी। दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रधान सचिव डॉ. सतबीर बेदी ने बताया कि कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरों को सामाजिक सुरक्षा की जरूरत है। दिल्ली में महिला एवं बाल विकास विभाग की 22 संस्थाएं किशोर न्याय कानून 2000, के अंतर्गत किशोर गृह चला रही हैं। यहां रह रहे लावारिस बच्चों को सुरक्षा दी जाएगी। इनमें से 16 किशोर गृह ऐसे बच्चों के लिए हैं, जो आश्रय रहित, लावारिस, घर से भागे हुए तथा अपराध के शिकार रहें हैं।
बेदी ने बताया कि गैर सरकारी संगठन जो इस तरह के सुधार गृह चला रहे हैं, उन्हें उपरोक्त कानून की धारा 34, 37 एवं 41 के अंतर्गत पंजीकृत प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। वर्तमान में ऐसे 51 गैर सरकारी संगठन इस कानून के अंतर्गत आश्रय गृह चला रहे हैं । ऐसे बच्चों को 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, क्योंकि उनके पास व्यक्तिगत पहचान साबित करने के लिए उनके पास कोई प्रमाण नहीं होता।
डॉ. बेदी ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक जागरूकता अभियान की शुरुआत की है जिसमें ऐसे बच्चे जो सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित आश्रय गृहों में रह रहे हैं, उनको इन संस्थानों से छोड़े जाने से पहले ही आधार कार्ड मिल सकें, इसके लिए विभाग प्रयासरत है।
इन गृहों के सभी अधीक्षकों को आदेश दिया गया है कि वे आधार प्रमाण पत्र जारी करने वाले प्राधिकरण से संपर्क कर इन सभी बच्चों को आधार प्रमाण पत्र बनवाएं। बच्चे आधार कार्ड प्राप्त होने से वे अपना चालक प्रमाण पत्र, मतदाता कार्ड, राशन कार्ड बनवा सकेंगें तथा बैंक में भी अपना खाता खुलवा सकेंगे।