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बदले गए ट्रैफिक नियम, सड़क हादसे में बच्चे की मौत पर होगी सात साल की जेल

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. ट्रैफिक नियमों को तोड़ना आने वाले दिनों में भारी पड़ सकता है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने शनिवार को सड़क सुरक्षा पर नया ड्राफ्ट जारी किया। इसमें न सिर्फ जुर्माने की राशि बल्कि कैद की अवधि भी बढ़ा दी गई है। सड़क सुरक्षा एवं परिवहन बिल 2014 पर मंत्रालय ने विभिन्न पक्षों से सलाह मांगी है। यह बिल शीत सत्र में संसद में पेश किया जाएगा। यह बिल छह विकसित देशों - अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर, जापान, जर्मनी और इंग्लैंड के नियमों को देखकर तैयार किया गया है। इसके तहत दुर्घटना में किसी बच्चे की मौत होने पर तीन लाख रु. जुर्माना और सात साल की कैद।
सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि देशभर में सुरक्षित, कम लागत वाली और तेज परिवहन व्यवस्था हमारा उद्देश्य है। पारदर्शिता लाने के लिए बिल में ई-गवर्नेंस पर जोर दिया गया है। सड़क परिवहन पर नियंत्रण के लिए मोटर व्हीकल रेगुलेशन एंड रोड सेफ्टी अथॉरिटी बनेगी। उन्होंने कहा कि सड़क क्षेत्र में नए निवेश से 10 लाख नई नौकरियां सृजित होंगी।
बिल के मुताबिक, एक व्यक्ति के नाम दोबारा लाइसेंस जारी न हो, इसके लिए एकल-खिड़की व्यवस्था होगी। यह एकीकृत बायोमीट्रिक सिस्टम से जुड़ा होगा। इसी तरह वाहन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था भी यूनिफाइड होगी, यानी इसे देश में कहीं से भी देखा जा सकेगा। वाहनों की सुरक्षा के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। हर ट्रैफिक सिग्नल पर सीसीटीवी कैमरा लगाया जाएगा।
सुरक्षित ड्राइविंग के लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा। वाहनों में इंटेलिजेंट स्पीड एडेप्टेशन और ड्राइवर एलर्ट कंट्रोल सिस्टम होगा। वाहन निर्माताओं, परिवहन विभाग और बीमा कंपनियों के लिए एकीकृत डाटाबेस होगा। इससे वाहनों का ट्रांसफर आसान होगा। एक केंद्रीकृत सूचना केंद्र होगा जहां नियम उल्लंघन का रिकॉर्ड होगा। बार-बार नियम तोड़ने की जानकारी यहीं से मिलेगी।
मप्र:इलाज से इनकार पर लगेगा जुर्माना

मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर अब हर हाल में मरीजों का इलाज करेंगे। इनकार करने वाले डॉक्टरों पर सरकार जुर्माना लगाएगी। इसके लिए सरकार 2 अक्टूबर से स्वास्थ्य गारंटी योजना लागू करेगी। इससे सुविधायुक्त अस्पतालों में मरीजों की 30 प्रकार की जांच 24 घंटे और रोजाना होगी। सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी यूनिट में सबसे ज्यादा परेशानी हार्ट अटैक, सड़क हादसों के घायलों को होती है। इसकी वजह अस्पतालों में ओपीडी के बाद सोनोग्राफी, एक्सरे, ईसीजी, ब्लड टेस्ट, कल्चर टेस्ट का न होना है।

इस स्थिति में इमरजेंसी में सरकारी अस्पतालों से मरीज निजी अस्पतालों को रैफर किए जाते हैं।
इसके अलावा कुछ अस्पतालों के डॉक्टर्स मरीजों को खुद के फायदे के लिए दूसरे अस्पताल रैफर कर देते हैं। इसके चलते समय पर इलाज न मिलने के कारण कई मरीजों की हालत बिगड़ जाती है। स्वास्थ्य गारंटी योजना के तहत अस्पताल में पहुंचे हरेक मरीज काे इलाज देने की जिम्मेदारी डॉक्टर की होगी।
रोड सेफ्टी एंड ट्रांसपोर्ट बिल 2014
  • दुर्घटना में किसी बच्चे की मौत होने पर तीन लाख रु. जुर्माना और सात साल की कैद।
  • ट्रैफिक सिग्नल तीन बार तोड़ने पर 15,000 रु. जुर्माना, एक माह के लिए लाइसेंस निलंबित और रिफ्रेशल ट्रेनिंग।
  • शराब पीकर गाड़ी चलाने पर पहली बार 25,000 रु. का जुर्माना या तीन महीने तक की कैद या दोनों। लाइसेंस छह महीने तक निलंबित।
  • तीन साल में दूसरी बार पकड़े जाने पर 50,000 का जुर्माना या एक साल तक की जेल या दोनों। लाइसेंस एक साल के लिए निलंबित।
  • तीसरी बार पकड़े जाने पर लाइसेंस रद्द, वाहन 30 दिन के लिए जब्त होगा
  • अगर स्कूल बस ड्राइवर शराब पीकर गाड़ी चलाते पकड़ा जाता है तो 50,000 का जुर्माना और तीन साल की जेल। ड्राइवर 18-25 साल का हुआ तो लाइसेंस भी रद्द होगा।
  • वाहनों के डिजाइन में सुधार होगा। मैन्युफैक्चरिंग डिजाइन में गड़बड़ी होने पर प्रति वाहन पांच लाख का जुर्माना और जेल।
मोटर एक्सीडेंट फंड
सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को एक घंटे में इलाज मुहैया कराया जाएगा। इनके इलाज के लिए मोटर एक्सीडेंट फंड बनेगा। इस फंड से देश में सड़कों का इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति को अनिवार्य बीमा कवर मिलेगा। भारत में हर साल करीब पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें एक लाख 40 हजार लोगों की मौत हो जाती है।
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