(खादी जैकेट में मोदी)
अहमदाबाद/नई दिल्ली. इसे आप ‘हिंदी-चीनी, भाई-भाई’ नारे का दूसरा भाग कह सकते हैं। भारत-चीन की दोस्ती पर यह नारा पचास के दशक में दिया गया, लेकिन 1962 की जंग के बाद से रिश्तों पर तनाव हावी रहा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जब बुधवार को भारत पहुंचे तो रिश्तों में पुरानी गर्मजोशी फिर नजर आई। जिनपिंग के दौरे के पहले दिन की झलक...
पहली बार किसी के लिए इतने बेसब्र दिखे मोदी
अहमदाबाद में जिनपिंग का विमान 30 मिनट की देरी से पहुंचा। मोदी उनकी अगवानी के लिए एयरपोर्ट जाने वाले थे। बाद में उनका प्लान बदल गया। वे जिनपिंग के स्वागत के लिए हयात होटल पहुंचे। जैसे-जैसे वक्त बीत रहा था, मोदी की बेसब्री भी बढ़ रही थी। कभी घड़ी देखते तो कभी जेब से कागज निकालकर चीन के राष्ट्रपति का पूरा नाम याद करते।
मोदी बने गाइड
जिनपिंग जब साबरमती आश्रम पहुंचे तो मोदी ने खुद उन्हें महात्मा गांधी के जीवन और आश्रम के इतिहास के बारे में बताया। रिवर फ्रंट पर मोदी जिनपिंग को गुजराती संस्कृति के बारे में हर छोटी चीज बताते रहे।
नदी किनारे खमण चखा
रिवर फ्रंट पर डिनर में नॉयलोन खमण, सैंडविच ढोकला, तिल की खांडवी जैसे व्यंजन जिनपिंग को परोसे गए। उन्होंने सिर्फ खमण चखा। बाद में चायनीज पकवान ही खाए।
आज दिल्ली में बातें
बुधवार रात जिनपिंग दिल्ली पहुंच गए।
गुरुवार सुबह वे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलेंगे। फिर राजघाट जाएंगे।
सुबह 10 बजे सुषमा स्वराज उनसे मिलेंगी।
मोदी के साथ उनकी बातचीत सुबह 11 बजे हैदराबाद हाउस में शुरू होगी।
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