नई दिल्ली । सालभर में विभिन्न क्लीनिकल ट्रायलों में लगभग 370 जानें गई हैं। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) इन मौतों को गंभीरता से ले रही है। ज्यादातर ट्रायलों में मुआवजे के नए फार्मूले के तहत भुगतान किया गया है।
डीसीजीआई प्रमुख डॉ. जीएन सिंह ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही नए क्लीनिकल ट्रायलों की अनुमति दी जा रही है। फरवरी, 2013 से लगभग 22 लोगों को नए नियमों के तहत मुआवजा दिया जा चुका है। मुआवजे की रकम दवाओं के रिएक्शन और अन्य वजहों को ध्यान में रखकर दिया गया है। ट्रायल में पीड़ित लोगों को 4 लाख से 40 लाख तक की रकम अदा की गई है। डीसीजीआई प्रमुख ने आगे बताया कि 370 हादसों में से लगभग 60 फीसदी मामलों का हल किया जा चुका है।
डीसीआई के अतिरिक्त ड्रग कंट्रोलर जनरल विशाला का कहना है कि क्लीनिकल ट्रायलों में होने वाले हर तरह के हादसों से निबटने के लिए पूरी तरह से एक स्वतंत्र सेल का निमार्ण किया गया है। इसमें फार्मा से जुड़े विभिन्न एक्सपर्ट को भी तैनात किया गया है।