नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा के जो परिणाम सामने आए हैं, उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। सालों तक देश में शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी तो अपना खाता भी नहीं खोल सकी। कांग्रेस ने पूर्व खेल मंत्री अजय माकन को प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया था, जो खुद अपनी सीट ही नहीं बचा पाए। हार की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने कांग्रेस के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है।
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद के लिए यहां किसी को उम्मीदवार नहीं बनाया गया था। दिल्ली की सदर बाजार सीट से मैदान में उतरे अजय माकन को मात्र 16 हजार वोट ही मिले और वो तीसरे नंबर पर रहे।
घर के बाहर चली थीं गोलियां
अजय माकन 1985 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष रह चुके हैं। वे एकमात्र ऐसे अध्यक्ष थे जो बीएससी केमेस्ट्री के फाइनल ईयर में होते हुए इस पद पर रहे। कहा जाता है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव में उन्हें अपने चाचा ललित माकन की मौत का फायदा मिला था। ललित माकन भारत के पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा के दामाद थे। ललित माकन के परिवार को उनके घर के बाहर ही तीन आतंकियों ने गोलियों से भून दिया था।
अजय माकन का राजनीतिक सफर
अजय माकन की शुरुआती पढ़ाई सेंट जेवियर स्कूल से हुई। उनके दादा ओपी माकन स्वतंत्रता सेनानी थे। पिता सीपी माकन भी दिल्ली की पहाड़गंज सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। वे इस चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार थे। अजय माकन भी लगातार दिल्ली यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष रहे थे। उन्होंने
दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी लगातार तीन बार जीत हासिल की। हर बार उनकी जीत का अंतर भी बढ़ता गया है। 1993 में वे 4 हजार वोट से जीते थे। 1998 में 20 हजार और 2003 में 24 हजार वोटों से जीत हासिल की।
संभाले कई महत्वपूर्ण पद
2001 में अजय माकन को ट्रांसपोर्ट, पावर और टूरिज्म मंत्रालय दिया गया। इस दौरान उन्होंने सीएनजी के इस्तेमाल पर जोर दिया।
2007 आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन विभाग के मंत्री रहे। इस दौरान वे सबसे युवा कैबिनेट मिनिस्टर भी रहे।
2009 में राज्य गृह मंत्रालय संभाला।
2011 में खेल मंत्री बने।
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