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आप की ‘सुनामी’ में कांग्रेस ने खोया मुस्लिम जनाधार

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. दिल्ली में आम आदमी पार्टी मुस्लिम बहुल इलाकों का समर्थन अपने पक्ष में करने में कामयाब रही और पांच मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों में से चार पर जीत हासिल की। त्रिकोणीय मुकाबले में ऐसी एक सीट भाजपा की झोली में चल गई। मटिया महल, बल्लीमारान, सीलमपुर, मुस्तफाबाद और ओखला मुस्लिम बहुल सीटें हैं। 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बल्लीमारान, सीलमपुर, ओखला और मुस्तफाबाद सीट पर जीत हासिल कर अपनी इज्जत बचाई थी, लेकिन इस बार इन मुस्लिम बहुल इलाकों ने कांग्रेस का साथ नहीं दिया और उन चार में से तीन सीटों पर कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई। वहीं मुस्तफाबाद में कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही।

बल्लीमारान से विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता हारून यूसुफ 1993 से लगातार चुनाव जीतते आ रहे थे, लेकिन इस बार वह तीसरे नंबर पर चले गए और आम आदमी पार्टी के इमरान हुसैन ने भाजपा के श्याम लाल मोरवाल को 33,877 वोटों के अंतर से पटखनी दी। यूसुफ को महज 13,205 वोट मिले। वहीं 2013 में यहां से यूसुफ को 32,105 वोट, भाजपा के मोती लाल सोढ़ी को 24,012 वोट मिले थे। यहां से आप की फरहाना अंजुम चौथे स्थान पर रहीं थीं और उन्हें 13,103 वोट पड़े थे। सीलमपुर की भी कहानी कुछ यूं ही है। यहां से 1993 में मतीन अहमद जनता दल के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे, जबकि 1998 में निर्दलीय के तौर पर।
इसके बाद 2003, 2008 और 2013 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़। इस बार भी कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थे, मगर वह तीसरे नंबर पर रहे। यहां से आप के मोहम्म्द इसराक 57,302 वोट मिले, वहीं भाजपा के संजय जैन दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें 29,415 तो मतीन को 23,791 वोट पड़े।
इसराक ने यहां से 27887 वोटों से जीत दर्ज की है। 2013 में इस सीट पर मतीन को 46,452 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के कौशल कुमार मिश्र ने दूसरे नंबर रहते हुए 13,352 वोट प्राप्त किए थे। यहां से आप के मसूद अली खान चौथे नंबर पर रहे थे और उन्हें 12,969 वोट मिले थे।
मुस्तफाबाद विधानसभा सीट का उदय 2007 में हुए परिसीमन के बाद हुआ था। 2008 में सीट पर पहली बार हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हसन अहमद ने जीत दर्ज की थी और 2013 के चुनाव में भी कांग्रेस के टिकट पर ही अपना पुराना प्रदर्शन दोहराने में कामयाब रहे थे, पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबले में उन्हें भाजपा के जगदीश प्रधान से 6,031 वोटों से हार का मुंह देखना पड़ा।
प्रधान को 58,388, कांग्रेस के हसन को 52,357 वोट मिले, जबकि आप के मोहम्मद युनूस तीसरे नंबर पर रहे और उन्हें 49,791 वोट मिले। 2013 में हसन को 56,250, प्रधान को 54,354 वोट मिले थे। इस बार की तरह पिछली बार भी आप यहां तीसरे नंबर पर रही थी और आप के कपिल धामा को 19,759 वोट मिले थे।