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कांग्रेस से वापस लिया जाए चुनाव चिह्न हाथ का पंजा, दायर की गई याचिका

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली। चुनाव आयोग के समक्ष दायर एक याचिका में गुजारिश की गई है कि इंडियन नेशनल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को भारतीय तिरंगे के इस्तेमाल से रोका जाए। याचिका में यह आग्रह भी किया गया है कि आयोग कांग्रेस के चुनाव चिह्न ‘हाथ का पंजे’ को वापस लेकर उसे कोई नया निशान आवंटित किया जाए।
याचिका राजधानी के दरियागंज इलाके से दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की भाजपा पार्षद सिम्मी जैन ने दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक पार्टियों के भारतीय तिरंगे का इस्तेमाल करने से मतदाता-जनता भ्रमित होती है। वे किसी भी राष्ट्रीय कार्यक्रम को उस पार्टी का कार्यक्रम समझ बैठते हैं। जनता को लगता है कि उसी पार्टी की सरकार है। पंचायत से लेकर केंद्रीय मंत्रालयों या विदेश में भी भारतीय दफ्तरों पर तिरंगा लगा देखकर कई लोगों को यह गलतफहमी हो जाती है कि यह पार्टी का ही दफ्तर है। यही नहीं, पार्टियां भारतीय तिरंगे की शैली और डिजाइन का मनमाने तरीके से इस्तेमाल करती हैं।
उस पर राष्ट्रीय चिह्न की जगह अपना निशान लगाती हैं जो भारतीय तिरंगे का अपमान है। पार्टियां अपने होर्डिंग, पोस्टर व बैजेज में तिरंगे को बैकग्राउंड की तरह इस्तेमाल करते हैं। फिर जाने-अनजाने वह कटफट जाता है, बदरंग हो जाता है, उसका रूप बिगड़ जाता है जिसकी कोई परवाह नहीं की जाती।
"पूर्ण निशान नहीं है पंजा'

जैन ने अपनी याचिका में कांग्रेस के चुनाव चिह्न हाथ का पंजे को भी इस आधार पर तत्काल प्रभाव से वापस लेने का अनुरोध किया है कि वह पूर्ण निशान नहीं है और धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा है। जैन के मुताबिक, चुनाव आयोग की परिभाषा के हिसाब से कोई भी निशान पूर्ण होना चाहिए तो हाथ के पंजे को इसमें छूट क्यों दी गई है जबकि यह मानव शरीर का एक कटा हुआ हिस्सा है। हालांकि आयोग पूर्ण मानव शरीर को ही एक निशान के रूप में इस्तेमाल की अनुमति दे सकता है। रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट-1951 की धारा 123 (3) में साफतौर पर कहा गया है कि किसी भी उम्मीदवार को ऐसा निशान आवंटित नहीं किया जा सकता जो धार्मिक व राष्ट्रीय चिह्न हो और उसमें भावनात्मक अपील हो। जबकि हाथ जैन धर्म में धार्मिक चिह्न के रूप में इस्तेमाल होता है जिसका अर्थ है अहिंसा परमो धर्म:।