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एम्स: नियमों को धता बता खरीदे गए करोड़ों के सर्जिकल उपकरण

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स में नियमों को ताक पर रखकर सर्जिकल वस्तुओं की खरीद-फरोख्त का गोरखधंधा चल रहा है। कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए पहले तो आवश्यकता से अधिक सामान कुछ चुनिंदा कंपनियों से खरीदा गया और बाद में बगैर उपयोग के इन उपकरणों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह मामला जांच के लिए सीबीआई के पाले में चला गया है और पिछले सप्ताह एम्स के एक वरिष्ठ अधिकारी को सीबीआई ने तलब भी किया था।
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2008 से वर्ष 2014 के बीच सर्जिकल उपकरणों को खरीदने के लिए नियमों का जमकर उल्लंघन किया गया। बगैर ओपन टेंडर के ही कुछ चहेती कंपनियों से आवश्यकता से अधिक सर्जिकल उपकरण खरीदे गए। लेकिन आवश्यकता से अधिक उपकरण खरीदने की वजह से ये उपकरण खराब हो गए।
खरीदे गए उपकरण
हार्निया जैसी बीमारी के ऑपरेशन के दौरान उपयोग होने वाली मेश (जाली), टीएलवी 30 स्टेपलर, डिस्पोजेबल सीजर, अल्ट्रा एलसीएस लैप्रोस्कोपिक सीजर, एंडोक्लिंच, डिस्पोजेबल सर्जिकल ट्रोकर, प्रोसिड सर्जिकल इत्यादि।
ऐसे हुआ खुलासा
इस मामले में खुद स्टोर के एक कर्मचारी ने केंद्रीय सतर्कता आयोग को शिकायत की। आयोग के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया। कमेटी के सदस्यों ने जांच के तहत स्टॉक रजिस्टर, वर्ष 2013-14 की परचेज फाइल, इंस्पेक्शन नोट रजिस्टर और इंडेंट सिस्टम की जांच की। इसके अलावा रूम नंबर 5025, 5001, 5023 और एंडोस्कोपी रूम-सी-7 वार्ड की पड़ताल की।
67 लाख गए पानी में
जांच के दौरान टीम ने कई दर्जन फाइलों में से रैंडम तरीके से 17 फाइलों की जांच की। जांच के दौरान दो कमरों में 67 लाख रुपए के उपकरण बगैर उपयोग के ही बर्बाद हो गए थे। इसके अलावा जांच में यह भी पाया गया कि ये 17 फाइलें वर्ष 2013 में मात्र दो महीनों के दौरान मात्र दो फर्मों से संबंधित हैं। इनमें से एक 12 फाइलें एचएस एंटरप्राइजेज और 5 फाइलें ओवरसीज एसोसिएट्स से संबंधित हैं।