पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंनई दिल्ली. दिल्ली के 70 गांवों की जमीन पर कंट्री होम्स विकसित होंगे। अर्थात छोटे फार्म हाउसों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि इन इलाकों में आसमान छूते मकानों के निर्माण को रोका जा सके। इस बाबत संबंधित फार्म हाउस मालिक को अतिरिक्त राशि जमा करनी पड़ेगी। डीडीए पुरानी फार्म हाउस नीति में परिवर्तन करते हुए निर्धारित एफएआर से अधिक निर्माण करने की मंजूरी देगा। मास्टर प्लान 2021 के संशोधित प्लान में इस प्रस्ताव को शामिल किया जा रहा है। डीडीए सूत्रों के मुताबिक फार्म हाउस में अतिरिक्त निर्माण के लिए डीडीए ने टैक्स के लिए दो दरें तय की हैं। निर्धारित टैक्स के तहत पहली दर में 16 हजार रुपए और दूसरी दर में 18 हजार रुपए प्रतिवर्ग मीटर की दर से शुल्क वसूला जाएगा। इसके साथ ही भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क भी जमा करना होगा। डीडीए की जनसंपर्क अधिकारी नीमोधर का कहना है कि इस बाबत मास्टर प्लान 2021 में संशोधन किया जाएगा।
फार्म हाउस के दायरे में 4000 वर्ग मीटर का भूखंड : अब तक ढाई एकड़ से कम भूखंड वाला फार्म हाउस अवैध माना जाता था, लेकिन नए नियम के तहत 0.4 हेक्टेयर (4000 वर्ग मीटर) भू-भाग पर बने फार्म हाउस को भी मंजूरी मिलेगी।
बढऩे लगी कीमत : 70 इलाकों को नए फार्म हाउस की नीति के दायरे में रखा गया है। इन इलाकों में बाकायदा विज्ञापन के जरिए फार्म हाउस सहित बंगले की बिक्री का प्रचार किया जा रहा है। एक एकड़ जमीन पर 800 गज तक निर्माण किया जा सकता है। अत: इनकी कीमत भी बढऩे लगी है। इस बाबत डीडीए ने 31 दिसंबर 2013 को नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
लाभ
अब इन इलाकों की जमीन की कीमत और अधिक बढ़ जाएगी। कृषि आधारित भूमि की बिक्री आसान हो जाएगी। क्योंकि जमीन का वास्तविक इस्तेमाल कृषि भूमि के तौर पर ही माना जाएगा।
ये हैं इलाके
छतरपुर, खानपुर, सतबड़ी, देवली, भाटी, फतेहपुर बेरी, असोला, जौनापुर, चंदलहोला, गदईपुर, सुल्तानपुर, महरौली, रजोकरी, समालखा, घिटोरनी, रंगपुरी, हौलंबी खुर्द, बाकौली, बख्तावरपुर, हिरनकूदना, बिजवासन, बामनौली गांव।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.