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दामिनी : नाबालिग की सजा पर फैसला ५ को

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. वसंत विहार में पिछले साल 16 दिसंबर को पैरामेडिकल छात्रा से हुए सामूहिक दुष्कर्म के नाबालिग आरोपी की सजा पर फैसला टल गया है। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड अब इस पर पांच अगस्त को निर्णय देगा। यह फैसला पहले 11 जुलाई को भी टाला गया था।


आरोपी नाबालिग के वकील राजेश तिवारी ने बताया कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में मामला लंबित होने के आधार पर फैसला टाला है। गौरतलब है कि जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है।

इसमें मांग की है कि 'जुवेनाइलÓ (किशोर) की परिभाषा को बदला जाए। उसका दोष और सजा तय करते समय 18 वर्ष की आयु सीमा के बजाय उसकी मानसिक और बौद्धिक परिपक्वता को आधार बनाया जाए। कोर्ट ने 23 जुलाई को याचिका मंजूर करते हुए स्वामी से कहा था कि वे इसकी सूचना जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को दे दें। शीर्ष कोर्ट में इस याचिका पर 31 जुलाई को सुनवाई होनी है।


जांच और कानून-व्यवस्था के लिए पुलिस में अलग-अलग शाखा बनाने के मुद्दे पर मांगा केंद्र से जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस में जांच और कानून-व्यवस्था के लिए अलग-अलग शाखा बनाने पर केंद्र से जवाब मांगा है। कोर्ट का कहना है कि इससे मामलों की जांच और बेहतर होगी। कार्यवाहक चीफ जस्टिस बीडी अहमद और जस्टिस विभु बाखरू ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल राजीव मेहता से इस मुद्दे पर दो हफ्ते में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी। कोर्ट का यह आदेश 16 दिसंबर के सामूहिक दुष्कर्म मामले में सरकारी वकील दयान कृष्णन के इस तर्क पर आया है कि पुलिस वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रही है। इस पर बेंच ने पुलिस से पूछा कि आप अन्य सभी मामलों में भी वैज्ञानिक तरीके से जांच क्यों नहीं करते? क्या आपको लगता है कि शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधरी है? कोर्ट का मानना है कि यदि जांच और कानून-व्यवस्था की अलग-अलग शाखाएं होंगी तो कई अपराधी बचकर नहीं निकल सकेंगे। इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति भी सुधरेगी।