नई दिल्ली. दिल्ली विकास प्राधिकरण भले ही 10 लाख से ज्यादा आवासीय योजना के आवेदन फार्मों की बिक्री करने का दावा कर रहा हो, लेकिन योजना में शामिल शर्तों की वजह से हाउसिंग ड्रॉ के बावजूद कई सफल आवेदक फ्लैट की कुंजी पाने में असफल साबित हो सकते हैं। डीडीए ने सभी सफल आवेदकों से संबंधित मकान की संपत्ति का ब्यौरा मांगा है, जो कि किराएदार के लिए टेढ़ी खीर है। इसके अलावा आवेदक के खाते का केवाईसी मानकों का भी पालन करना अनिवार्य किया गया है।
हाउसिंग के लिए आवेदन करने वालों के लिए डीडीए ने कई शर्तें रखी हैं। फ्लैटों के ड्रॉ के पश्चात सफल आवेदक को निवास स्थान की संपत्ति के स्वामित्व का प्रमाण पत्र भी जमा करना होगा, जो कि दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए काफी मशक्कत भरा है। चूंकि अधिकांश मकान मालिक किराएदार को अपनी संपत्ति का ब्यौरा किसी भी हालत में नहीं देंगे। क्योंकि ऐसा करने में मकान मालिक को किराए के ऐवज में आयकर के भुगतान का डर रहता है। इसी वजह से आज भी बगैर पुलिस वेरीफिकेशन के ही लाखों की तादाद में किराएदार दिल्ली
में रह रहे हैं।
केवाईसी मानक का पालन अनिवार्य
साथ ही योजना में उन्हीं सफल आवेदकों को ही आवासीय लाभ दिया जाएगा, जिनके खाते के बारे में संबंधित बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक के केवाईसी (नो योर कस्टमर) मानकों का पालन किया हो। इसके अलावा आवेदन पत्र में उल्लिखित खाते की बैंक पासबुक अथवा खाते का पिछला एक वर्ष का विवरण अथवा वित्त वर्ष 2012-13 या वर्ष 2013-14 की जमा आयकर का विवरण भी देना होगा। जबकि आज भी काफी तादाद में बैंकों ने अपने खाता धारकों का केवाईसी डिटेल इकट्ठा ही नहीं किया है। इन दोनों मामलों में डीडीए उपाध्यक्ष बलविन्दर कुमार ने कहा कि सोमवार को अधिकारियों से इस बाबत बात की जाएगी।
केवाईसी में दी जाने वाली जानकारी
इसके तहत खातेदार द्वारा बैक को अपना पैन कार्ड, वार्षिक आय, व्यवसाय, निवास प्रमाण पत्र, पहचान पत्र इत्यादि के प्रमाण पत्र जमा करने होते हैं।