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  • Delhi Election Result : कांग्रेस के पास जो 43 सीटें थीं, उनमें से 42 AAP को मिल गईं

दिल्ली में AAP ने 14 महीने में कांग्रेस से 98% सीटें छीन लीं

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में 14 महीने के अंदर कांग्रेस से 98% सीटें छीन लीं। दिल्ली में दो बार चुनाव होने की वजह से कांग्रेस को नुकसान हुआ। भाजपा ने पिछली बार 32 सीटें जीती थीं लेकिन वह भी अपनी पिछली जीती एक ही सीट बचा पाई। एक सीट उसने कांग्रेस और एक आम आदमी पार्टी से छीनी और कुल 3 सीटें ला सकी।
कांग्रेस ने दो बार में कैसे गंवाई अपनी सीटें?
1. 2013 के चुनाव से पहले कांग्रेस के पास 43 सीटें थीं। लेकिन 2013 में केजरीवाल की पार्टी ने कांग्रेस से 18 सीटें छीन लीं। वहीं, 17 सीटें भाजपा ने छीन लीं।
2. कांग्रेस जब 2015 के चुनाव में उतरी तो उसके पास 8 सीटें थीं। लेकिन कांग्रेस खाता भी नहीं खोल पाई। उसकी 8 में से 7 सीटें AAP और 1 सीट भाजपा के खाते में चली गई।
3. आम आदमी पार्टी के पास कांग्रेस की 23 सीटें (18 पिछले चुनाव से और 7 इस चुनाव से) आ गईं। AAP ने भाजपा से भी वे 17 सीटें छीन लीं जो हर्षवर्धन के नेतृत्व में पिछले चुनाव में BJP ने कांग्रेस से हथियाई थीं।
4. इस तरह नवंबर 2013 तक कांग्रेस के पास जो 43 सीटें थीं, उनमें से 42 सीटें 14 महीने में आम आदमी पार्टी के खाते में चली गईं।
भाजपा को भी अपनी 90% सीटों का नुकसान
भाजपा ने पिछली बार 31 सीटें जीती थीं। इस बार उसने 28 सीटें यानीं 98% खो दीं। दिल्ली में भाजपा अपनी एक ही सीट विश्वासनगर बचा पाई। यहां से ओपी शर्मा जीते। यह सीट उन्हीं के पास थी। वहीं, रोहिणी से विजेंदर गुप्ता जीते। इन्होंने आम आदमी पार्टी से यह सीट छीनी। मुस्तफाबाद मुस्लिम बहुल वोटर्स वाली सीट है। यहां से भाजपा के जगदीश प्रधान करीब पांच हजार वोट से जीत गए।
आप ने सिर्फ एक सीट गंवाई
आम आदमी पार्टी ने अपनी सिर्फ एक ही सीट गंवाई। उसने पिछली बार की जीती 27 सीटें बरकरार रखीं। वहीं, 7 कांग्रेस से, 31 भाजपा से और 2 अन्य से छीनीं।
मुस्लिम बहुल वोटर्स वाली 10 में से 9 सीटें AAP को
दिल्ली में मटियामहल, बल्लीमारान, चांदनी चौक, ओखला, सीलमपुर, रिठाला, शाहदरा, सीमापुरी, बाबरपुर और मुस्तफाबाद सीटों पर मुस्लिम वोटर्स की संख्या 30 से 40% है। इनमें से 9 सीटें AAP ने जीतीं। सिर्फ मुस्तफाबाद सीट भाजपा को मिली।
देश में भाजपा के 1029 और कांग्रेस से 941 विधायक
जम्मू कश्मीर और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने के बाद भाजपा के पास 1058 और कांग्रेस के पास 949 विधायक थे। दिल्ली विधानसभा भंग होने के बाद भाजपा विधायकों की संख्या घटकर 1026 और कांग्रेस विधायकों की संख्या 941 हो गई। दिल्ली चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद अब दिल्ली में भाजपा के पास 1029 विधायक हैं। कांग्रेस के विधायकों की संख्या उतनी ही है।
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