सबसे पहले डाक से वोटों की गिनती होती हैवोटिंग के बाद ईवीएम मशीनों को सुरक्षित कमरों में केंद्रीय बलों की निगरानी में रखा जाता है। हर विधानसभा सीट के लिए वोटों की गिनती एक जगह होती है। सबसे पहले डाक से आए मतों को गिना जाता है। डाक मतों की गिनती शुरू होने के आधे घंटे बाद ही ईवीएम से गिनती शुरू होती है। मशीनों को सुरक्षित कमरों से बैरिकैडेड एरिया के जरिए लाया जाता है। (
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एक बार में 14 ईवीएम की गिनती
एक बार में अधिकतम 14 ईवीएम की ही गिनती की जा सकती है। इसके लिए काउंटिंग एरिया में 14 टेबल लगाए जाते हैं। हर काउंटिंग टेबल पर एक सरकारी (इलेक्शन) ऑफिशल और पार्टियों के एजेंट्स रहते हैं जो कैंडिडेट्स की ओर से काउंटिंग पर नज़र रखते हैं।
तार का बाड़ा एजेंट्स को दूर रखता है
इलेक्शन अधिकारी और पार्टी एजेंट्स के बीच तार का बाड़ा लगा होता है, ताकि एजेंट्स ईवीएम को छू नहीं सकते। काउंटिंग करने वाले अधिकारी सबसे पहले ईवीएम पर लगे कागजी सील और दूसरे सील की जांच कर सुनिश्चित करते हैं कि मशीन से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है।
सील की जांच के बाद मशीन को ऑन किया जाता है
इसके बाद मशीन को ऑन किया जाता है। फिर रिजल्ट बटन दबा कर हर कैंडिडेट के नाम रजिस्टर्ड वोटों की संख्या निकाली जाती है। इस जानकारी को फॉर्म 17सी में भरा जाता है। फॉर्म 17सी पर कैंडिडेट्स के इलेक्शन एजेंट्स के दस्तखत लिए जाते हैं और फिर उसे रिटर्निंग ऑफिसर (पीठासीन अधिकारी) को सौंप दिया जाता है। दूसरे 13 टेबलों के फॉर्म 17सी भी रिटर्निंग ऑफिसर को भेजे जाते हैं और फिर रिटर्निंग ऑफिसर इन आंकड़ों को जोड़ लेता है। रिजल्ट्स को एक ब्लैक-वाइट बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाता है।
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र राउंड के नतीजे राज्य निर्वाचन आयुक्त को बताए जाते हैंईवीएम की काउंटिंग का आखिरी राउंड डाक मतों की गिनती पूरी हो जाने के बाद ही किया जा सकता है। हर राउंड की मतगणना के नतीजे राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को बताए जाते हैं। ऐसा तब तक चलता है जब तक फाइनल नतीजे नहीं आ जाते।
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