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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. दिल्ली सरकार द्वारा बिजली वितरण कंपनियों के बही-खाते की ऑडिट के आदेश को बिजली कंपनियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। डिस्कॉम ने इस बाबत हाईकोर्ट में रिट दायर की है। विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डिस्कॉम के बही-खाते की सीएजी से ऑडिट कराने को मुख्य मुद्दा बनाया था।
बिजली कंपनी बीएसईएस राजधानी और बीएसईएस यमुना के प्रवक्ता सीपी कामत के मुताबिक, सीएजी की शक्तियों के दायरे में दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियां नहीं आती हैं। सीएजी से सूचीबद्ध यानी एंपैनल्ड ऑडिटिंग संस्थान पिछले 10 वर्षों से लगातार कंपनियों का ऑडिट कर रहा है। कंपनी की यह भी दलील है कि दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) भी इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के तहत बिजली कंपनियों का कई बार स्पेशल ऑडिट कर चुका है।
डिस्कॉम के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में नौकरशाह
कंपनी की दलील है कि उसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में सरकार के प्रमुख अधिकारी जैसे मुख्य सचिव, वित्त सचिव और ऊर्जा सचिव भी शामिल हैं और इन कंपनियों के अकाउंट्स उनके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से प्रमाणित हैं।
बिजली खरीद सरकारी कंपनियों से होती है
कंपनियों की यह भी दलील है कि डिस्कॉम सभी बिजली सरकारी कंपनियों से खरीदती है। जिसकी कीमत सीईआरसी और डीईआरसी तय करती हैं। डिस्कॉम के कुल खर्चे का 85 फीसदी हिस्सा बिजली की खरीद में चला जाता है। इन बिजली उत्पादन कंपनियों का पहले से ही सीएजी ऑडिट हो रहा है।
डिस्कॉम सरकारी नहीं
प्रवक्ता की दलील है कि 23 अक्टूबर 2002 में सीएजी ने खुद डिस्कॉम को पत्र के माध्यम से कहा था कि कंपनी एक्ट 1956 की धारा 617 के तहत डिस्कॉम सरकारी संस्था नहीं है। इसलिए वे सीएजी के दायरे से बाहर हैं।
बिजली कंपनी और दिल्ली सरकार में आरोप-प्रत्यारोप शुरू
ऑडिट को लेकर बिजली कंपनियों और दिल्ली सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हो गया है। कल तक जहां दिल्ली सरकार कहती थी कि बिजली कंपनियों ने ऑडिट को लेकर नोडल अधिकारी की नियुक्ति नहीं की है, वहीं दूसरी ओर निजी बिजली कंपनी टाटा पॉवर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूटर लिमिटेड (टीपीडीडीएल) के अधिकारियों की दलील है कि उन्होंने चार बार दिल्ली सरकार के ऊर्जा विभाग को पत्र लिखकर ऑडिट मामले पर अपना एजेंडा स्पष्ट करने की मांग की। इस दौरान 30 दिसंबर 2013, 1 जनवरी 2014, 10 जनवरी और 14 जनवरी को दिल्ली सरकार को पत्र लिखा था। कंपनी ने सरकार से ऑडिट का विस्तृत टर्म एंड कंडिशन और स्कोप स्पष्ट करने की मांग की थी। लेकिन सरकार की तरफ से उन्हें किसी तरह की जानकारी मुहैया नहीं कराई गई।
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