नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस के मुताबिक राजधानी में शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों में करीब 40 फीसदी ड्राइवर ऐसे होते हैं जो एकाध नहीं बल्कि पांच छह पैग लगा चुके होते हैं। इसी साल एक जनवरी से 31 अगस्त के बीच ब्रेद एनालाइजर के टेस्ट में जो ड्रंकन ड्राइवर पकड़े गए उनमें से 39.28 फीसदी ड्राइवरों ने 150 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर यानी देश में तय वैध सीमा (30 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर खून में) से पांच गुना अधिक शराब गटक रखी थी। यहां यह जानना बेहद जरूरी है कि एक पैग (यूनिट) लेने से भी खून में अल्कोहल की मात्रा मान्य कानूनी सीमा से अधिक हो जाती है।
हार्ड ड्रिंक की जितनी भी किस्में हैं उनमें शुद्ध अल्कोहल का प्रतिशत अलग-अलग होता है। जैसे बीयर में (एक यूनिट-300 मिलीलीटर) 4.4 फीसदी अल्कोहल होता है। वाइन में (110 मिलीलीटर) 12.5 फीसदी, व्हिस्की, रम, ब्रांडी, जिन, वोदका (सभी का एक यूनिट करीब 30 एमएल) में 42.8 फीसदी अल्कोहल होता है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि शराब बिना पिए गाड़ी चलाना है सबसे सही फैसला है। क्योंकि कई दवाएं खाने या चॉकलेटी चीजें खाने पर भी खून में अल्कोहल की मात्रा 30 मिलीग्राम प्रति 100 एमएल से अधिक हो जाती है जबकि वास्तव में उन्होंने शराब नहीं पी है।
आधे से अधिक देशों के पास नहीं है रिकॉर्ड
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक आधे से अधिक देशों के पास अल्कोहल से जुड़े सड़क हादसों का सही रिकॉर्ड नहीं है। भारत की गिनती उन 135 देशों में है जहां बीएसी (ब्लड अल्कोहल कंसंट्रेशन) जांचने के लिए रेंडम ब्रेद टेस्ट किए जाते हैं। 89 देश ऐसे हैं जहां बीएसी 50 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर से कम रखी गई है। ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन रोड सेफ्टी बताती है कि महज 21 फीसदी देशों में इस कानून का अच्छी तरह पालन हो रहा है।
विकसित देशों में 20 फीसदी ड्राइवरों के बीएसी की मात्रा तय कानूनी सीमा से अधिक पाई जाती है जबकि विकासशील देशों में 33 से 69 फीसदी ड्राइवरों में अधिक बीएसी पाया जाता है। 17 देश ऐसे हैं जहां अल्कोहल पीने पर कानूनी पाबंदी है लेकिन उनमें से माली, मोरक्को, यूएई जैसे देशों में बीएसी की सीमा 50 मिग्रा प्रति 100 एमएल रखी गई है।
लोग सुधरते ही नहीं, जुर्माने से कोई नहीं डरता
हम प्रोफाइलिंग के आधार अल्कोमीटर से रेंडम टेस्टिंग करते हैं जैसे कोई परिवार सहित होता है तो हम उन्हें नहीं रोकते, लेकिन किसी तीन-चार लड़के यदि किसी गाड़ी में आ रहे हैं और शीशा उतरवाते ही हल्की सी महक आती है तो उनका टेस्ट लेते हैं। चंदर ने दावा किया कि उनके पास करीब साढ़े तीन सौ से अधिक अत्याधुनिक अल्कोमीटर हैं और वीकेंड नाइट में चैकपोस्ट पर प्रशिक्षित लोगों को ही ड्यूटी पर लगाया जाता है।
हर पोस्ट पर हम यह डेटा रखते हैं कि कितनों को रोका गया, कितनों की जांच हुई और ड्रंकन पकड़ा और उसकी मात्रा कितनी थी और उनका लाइसेंस भी पंच करते हैं। समस्या एन्फोर्समेंट नहीं, बल्कि डेटरेंस है। हमने बीते साल सड़क नियमों के उल्लंघन में 39 लाख से अधिक लोगों के चालान काटे, लेकिन इस साल बीते आठ महीने में ही 25 लाख से अधिक चालान काटे जा चुके हैं जाहिर है लोग सुधर ही नहीं रहे।
मुक्तेश चंदर, स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (ट्रैफिक)