पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंनई दिल्ली. दिल्ली में डीटीसी की बसों में यात्रा करने वाले सचेत हो जाएं, क्योंकि 600 बस चालक कथित रूप से वर्णांधता (कलर ब्लाइंडनेस) से पीड़ित हैं और फर्जी मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट के आधार पर बस चला रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा से संबंधित इस गंभीर मुद्दे को सूचना आयुक्त एम. श्रीधर आचार्युलु ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक पहुंचाया है।
मुख्यमंत्री को लिखे खुले पत्र में आचार्युलु ने कहा है कि उन्हें सूचना मिली है कि सैकड़ों चालकों ने फर्जी मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाए हैं और इसके आधार पर वे काम कर रहे हैं। आचार्युलु ने केजरीवाल को लिखे पत्र में कहा, 'आरोप है कि कम से कम 600 चालकों को वर्णांधता है और दूसरे अन्य कई चालक दूसरी तरह की समस्याओं से पीडि़त हैं। मुझे आशंका है कि अगर यह आंशिक रूप से भी सत्य है तो दिल्ली के यात्रियों के जीवन पर गंभीर खतरा है।' सूचना आयुक्त ने कहा कि वह कोई भी कार्रवाई करने में अक्षम हैं। एक चालक के बारे में आरटीआई आवेदन था, जिसकी जांच होने पर पता चला कि ऐसे सैकड़ों चालकों को बिना 'फिटनेस' के कथित रूप से नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिखा, 'चिंता की बात है कि आरटीआई आवेदन 18 जून 2012 का है जो नौकरशाही के अलग-अलग स्तर से गुजर रहा है और अभी तक मुकाम तक नहीं पहुंचा है।
गवाही के दौरान सतर्कता अधिकारी और याचिकाकर्ता ने कहा कि बिना फिटनेस के ऐसी सैकड़ों नियुक्तियों का मामला है और इसकी जांच की जरूरत है।' कथित धोखाधड़ी सामने तब आई जब आचार्युलु एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिन्होंने डीटीसी से चालकों की नियुक्ति की प्रक्रिया से संबंधित नौ बिंदुओं पर सूचना मांगी, जिसमें फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर नियुक्त चालकों पर की गई कार्रवाई भी शामिल है। कुछ शिकायत है जिनमें करीब 300- 400 चालकों की जांच की आवश्यकता है, जिन पर फर्जी सर्टिफिकेट लगाने का आरोप है। विभिन्न अस्पतालों में जिन लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए उनकी जांच स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड कर रहा है। ऐसे अन्य मामलों में जांच जारी है।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.