पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंनई दिल्ली. आखिरकार दिल्ली ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन ने 29 दिसंबर को 'दृष्टिदोष वाले 412 ड्राइवर दौड़ा रहे हैं डीटीसी' भास्कर द्वारा प्रकाशित खबर पर मुहर लगाते हुए 99 ड्राइवरों को बस चलाने से रोक दिया है। सूत्रों का कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच की गई तो लगभग 400 चालक कलर ब्लाइंड हैं जो बसों को सड़कों पर दौड़ा रहें हैं। ज्ञात हो कि भास्कर की पड़ताल में यह सामने आया था कि डीटीसी के मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई जांच में 412 चालक कलर ब्लाइंड (वर्णांधता), मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) व हाइपरोपिया (दूर दृष्टिदोष) से पीडि़त पाए गए थे। इन चालकों की भर्ती रोक दी गई थी। लेकिन पिछली सरकार के राजनैतिक दबाव में विभाग के मुखिया डॉ. एसपी गुप्ता पर इन कलर ब्लाइंड ड्राइवरों की भर्ती के लिए दबाव डाला गया था जिसका विभागीय मेडिकल बोर्ड के डॉक्टर ने कड़ा विरोध करते हुए भर्ती करने से रोक दिया।
इसके बाद विभाग के अधिकारियों ने डीटीसी के (रूल 9) के अंतर्गत यह नियम होने के बाद कि विभाग द्वारा मेडिकल में अनफिट पाए जाने पर बाहरी मेडिकल मान्य नहीं होंगे। इसके बावजूद विभागीय दबाव में कॉमनवेल्थ गेम का बहाना बनाकर इन्हें दिल्ली सरकार के गुरुनानक आई सेंटर में भेज दिया गया, जहां से इन ड्राइवरों को डाक्टरों ने मेडिकल जांच में क्लीनचिट दे दी। इसके बाद भी विभाग के मेडिकल ऑफिसर ने कड़ी आपत्ति जताई, लेकिन कलर ब्लाइंड, माइओपिया व हाइपरोपिया से पीडि़त 412ड्राइवर डीटीसी के बसों को 2009 से दिल्ली के सड़कों पर दौड़ा कर रोजाना लाखों सवारियों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
क्या था मामला
कॉमनवेल्थ गेम के लिए दिल्ली अधीनस्थ चयन सेवा आयोग द्वारा 2008 में भर्ती का आयोजन किया गया था, जिसमें 10 हजार उम्मीदवारों ने परीक्षा दी। जिसमें 4015 चालक योग्य पाए गए, मेडिकल परीक्षण में 855 चालक को अनफिट करार किया गया, जिसमें से 412 चालकों में कलर ब्लाइंडनेस पाई गई थी।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.