नई दिल्ली. दिल्ली के पहाड़गंज में पुलिस थाने के ठीक सामने ई-रिक्शे धड़ल्ले से चल रहे हैं लेकिन पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश करती भी नजर नहीं आ रही है। यहां कोई एक-दो नहीं बल्कि कई दर्जन रिक्शों की कतार लगी रहती है। यह हाल अकेले पहाड़गंज ही नहीं पूरी दिल्ली के हर इलाके का है। 31 जुलाई को ई-रिक्शों पर रोक लगने के बाद एक हफ्ते तक तो पुलिस की कुछ सख्ती नजर आयी लेकिन उसके बाद स्थिति जस की तस है।
राजधानी में हाईकोर्ट ने ई-रिक्शा पर इसके परिचालन के लिए किसी किस्म के कानून के अभाव के चलते रोक लगा रखी है। हालांकि केंद्र सरकार ने इसके नियमन के लिए अधिसूचना का ड्राफ्ट 16 सितंबर को ही जारी कर दिया था लेकिन न तो अदालत में अभी उसे मंजूरी मिली है और न ही वह अधिसूचना का अंतिम रूप था। 9 सितंबर को अदालत ने साफ कहा कि कानून के तहत जो चीज प्रतिबंधित है, उसके लिए इजाजत नहीं दी जा सकती। इससे पहले 31 जुलाई को अदालत ने यह कहते हुए ई-रिक्शा पर रोक लगा दी थी कि प्रथम दृष्टया यातायात व नागरिकों के लिए खतरनाक हैं। ई-रिक्शे का डिजाइन ही ऐसा है कि उस पर चार सवारियों के लिए ही अनुरूप है लेकिन रिक्शेवाले इन पर चार से ज्यादा सवारी ले जाते हैं और यात्रियों की जान को जोखिम में डाल देते हैं। अदालत ने यह भी कहा था कि ई-रिक्शे का पंजीकरण होना चाहिए, उनके पास परमिट होने चाहिए, उनके लिए उपयुक्त बीमा पॉलिसी हो और उन्हें ऐसे व्यक्ति चलाएं जिनके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस हो।
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने कहा कि ई-रिक्शों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। कहीं नजर आतें हैं तो उन्हें जब्त किया जाता है। पुलिस कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई कर रही है।
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