नई दिल्ली.दिल्ली हाई कोर्ट ने 16 दिसंबर के दामिनी सामूहिक दुष्कर्म कांड से जुड़े मामले में कहा कि हर नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक है लेकिन ऐसे प्रदर्शन दूसरे के अधिकारों में हस्तक्षेप न करे। इसके साथ ही न्यायालय ने दुष्कर्म के बाद व्यापक प्रदर्शन के दौरान कांस्टेबल सुभाष तोमर की मौत के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने के अनुरोध को खारिज कर दिया।
न्यायालय ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की भी मांग को खारिज कर दिया। तोमर की मौत के सिलसिले में हत्या, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित विभिन्न धाराओं को लेकर मामला दर्ज किया गया है। आठ प्रदर्शनकारियों में से सात का अनुरोध खारिज करते हुए न्यायमूर्ति जीपी मित्तल ने कहा इस चरण में प्राथमिकी खारिज नहीं की जा सकती और इस रिट याचिका पर आगे किसी निर्देश की जरूरत नहीं है।
दूसरी तरफ मामले की सुनवाई कर रही विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपियों के वकील को पीड़िता एवं उसके दोस्त के बीच अंतरंग संबंधों से सवाल पूछने की अनुमति नहीं दी। घटना के वक्त पीड़िता का दोस्त भी उसके साथ था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना ने कहा कि इस सवाल को बदनामी भरा होने के कारण अनुमति नहीं दी जाती है। बचाव पक्ष के वकील वीके आनंद और विवेक शर्मा के सवालों पर विशेष लोक अभियोजक दयान कृष्णन ने आपत्ति जताई।
वहीं, तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने गुरुवार को अदालत में मामले के आरोपी अक्षय सिंह के खिलाफ र्दुव्यवहार करने एवं नियमों के उल्लंघन करने की शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद आरोपी ने दावा किया कि जेल में उसकी नियमित तौर पर पिटाई होती है। अदालत ने कहा कि वार्ड नंबर एक कैदियों की ओर से शिकायत मिली है कि आरोपी अक्षय सिंह द्वारा जेल में र्दुव्यवहार किया जाता है।
अक्षय ने अपनी शिकायत में कहा कि उसे मनदीप दहिया एवं जितेंद्र पटेल नामक जेलकर्मियों द्वारा नियमित तौर पर पीटा जाता है। अक्षय के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए न्यायाधीश जेल अधिकारियों को अक्षय का मेडिकल ल परीक्षण क राने और पूरे मामले की जांच के बाद शुकवार को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।