नई दिल्ली. भले ही
दिल्ली विधानसभा चुनाव का परिणाम मंगलवार को आएगा, लेकिन आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अभी से सत्ता के मूड में नजर आने लगे हैं। पार्टी के संयोजक और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार अरविंद
केजरीवाल ने 15 फरवरी को राजभवन के बजाय रामलीला मैदान में ताजपोशी की तैयारी शुरू कर दी है। समर्थकों को उन्होंने आने के लिए भी न्यौता देना शुरू कर दिया है।
रविवार को दिल्ली के पंजाबी बाग से केजरीवाल के एक रिश्तेदार अपने बेटे की शादी के लिए उन्हें आमंत्रित करने उनके घर पहुंचे तो केजरीवाल ने उनका निमंत्रण स्वीकार कर लिया और लगे हाथों केजरीवाल ने परिवार को आगामी 15 फरवरी को रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण समारोह में आने का निमंत्रण भी दे डाला।
बता दें कि सात फरवरी शाम को चुनाव समाप्त होते ही एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी को सत्ता के करीब बताया जा रहा है। अमूमन सभी एग्जिट पोल आम आदमी पार्टी को बहुमत से अधिक सीटें जीतने का दावा कर रही हैं। एग्जिट पोल आते ही आप के अधिकांश वरिष्ठ नेताओं का बयान आना शुरू हो गया है।
ईवीएम की निगरानी के लिए स्वयंसेवकों को दिए निर्देश
खुद को सत्ता के करीब देखकर आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री
अरविंद केजरीवाल ने सात फरवरी की रात को सोशल मीडिया
ट्विटर के जरिए ट्वीट किया कि ईवीएम मशीनों की निगरानी के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती की जाए। केजरीवाल के ट्वीट पर आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष ने थोड़ी देर में ट्वीट कर जवाब दिया कि ईवीएम मशीनों की निगरानी के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती कर दी गई है।
मशीनों की 24 घंटे निगरानी के लिए स्वयंसेवकों को निर्देश दिया गया है। बता दें कि केजरीवाल ईवीएम मशीनों को लेकर पिछले दिनों भी चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि ईवीएम मशीनों के साथ छेड़छाड़ किया जा सकता है और अब चुनाव के बाद भी उन्होंने ईवीएम मशीनों के साथ छेड़छाड़ अथवा हेरफेर की आंशका जाहिर की है और इनकी सुरक्षा के लिए सुरक्षा एजेंसियों के अलावा अपने स्वयंसेवकों की तैनाती का निर्देश दिया है।
आप फंड इकट्ठा करने के लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकी
दिल्ली की बागडोर संभालने की दौड़ में आम आदमी पार्टी बेशक सबसे आगे दिख रही हो, लेकिन यह सात फरवरी के विधानसभा चुनाव से पहले 30 करोड़ रुपए इकट्ठा करने के अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकी।
आप की झोली में लगभग 18 करोड़ रुपए आए हैं। उसे ‘फंडरेजर डिनर्स’,‘कॉफी विद केजरीवाल’ और ‘सेल्फी विद मफलर मैन’ जैसी कई अभिनव पहल किए जाने के बावजूद वह चुनाव से पहले 30 करोड़ रुपए इकट्ठा करने के अपने लक्ष्य से पीछे रह गई है। हालांकि, पार्टी ने इसे सकारात्मक प्रगति के रूप में लिया है और इसके लिए अपने चंदा दाताओं पर दोष मढ़ने से मना कर दिया है।
आप के फंड संग्रह प्रभारी अरविंद झा ने बताया,‘मतदान दिवस तक हमारा लक्ष्य 30 करोड़ रुपए इकट्ठा करने का था लेकिन हम इसे पाने में असफल रहे हालांकि यह भी सही है कि जो कुछ भी हमने किया है वह केवल दो महीनों में किया है।’ वर्ष 2013 के चुनाव में पार्टी को लोगों से कहना पड़ा था कि चंदे के रूप में पैसा देना बंद करें, क्योंकि उनके पास काफी ज्यादा चंदा इकट्ठा हो गया था।
विस्तार से बताते हुए झा ने कहा,‘किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि हमने नवंबर अंत में चंदा लेना शुरू किया था और चंदा इकट्ठा करने के लिए हमें वर्ष 2013 में मिले समय से यह बहुत ही कम था।’ उन्होंने कहा कि डाटा बताते हैं कि पार्टी को चंदे के रूप में छोटी-छोटी रकम देने वाले दाताओं की संख्या और अधिक बढ़ी हैं, जो कि देश एवं विदेश दोनों में पार्टी के ‘बढ़ते हुए जनाधार’ का प्रतीक है।