नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए हुए मतदान के बाद सभी एक्जिट पोल्स के नतीजे आ गए हैं। सभी एक्जिट पोल्स के आंकड़े इसी ओर इशारा करते हैं कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। इस बीच बीजेपी की सीएम कैंडिडेट
किरण बेदी ने स्पष्ट कह दिया है कि
दिल्ली चुनाव में जीत या हार, जो भी हो उनकी जिम्मेदारी होगी। उन्होंने पार्टी को इतनी बड़ी भूमिका देने के लिए धन्यवाद दिया है।
मगर वाकई एक्जिट पोल के नतीजे ही अंतिम परिणाम बने तो यह बीजेपी के लिए किसी बड़े झटके से कम साबित नहीं होगा। लोकसभा चुनाव, फिर उसके बाद महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड,
जम्मू-कश्मीर में मिली शानदार कामयाबी के बाद बीजेपी को कतई ऐसे नतीजों की उम्मीद नहीं होगी। असली नतीजे तो 10 फरवरी को ही पता चलेंगे, लेकिन अगर ये एक्जिट पोल्स सही साबित हुए तो इनके कई अहम राजनीतिक अर्थ सामने आते हैं।
1 पीएम मोदी की लहर कमजोर पड़ी भले ही अब बीजेपी यह सफाई दे रही हो कि यह जनमत केंद्र सरकार के खिलाफ नहीं है, लेकिन बीजेपी इस बात को मानने से इनकार नहीं कर सकती कि उसने दिल्ली में पीएम मोदी समेत अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। बीते सभी राज्यों में मिली जीत का क्रेडिट पीएम मोदी के जादू को देने वाली बीजेपी अब इस हार का ठीकरा किसी और पर फोड़ना भी चाहे तो यह उसके लिए आसान नहीं होगा।
2 आम आदमी पार्टी को राजनीतिक जीवनदान मिला और दिल्लीवालों ने आखिरकार
केजरीवाल और उनकी पार्टी को पिछली बार दिल्ली छोड़कर जाने के लिए माफ कर दिया। ये चुनाव अगर किसी पार्टी के राजनीतिक अस्तित्व के लिए सबसे ज्यादा जरुरी थे तो वो आम आदमी पार्टी ही थी।
3 बीजेपी अध्यक्ष
अमित शाह की लीडरशिप पर पहली बार सवाल उठेगा। शाह पार्टी के लिए अभी तक 41 चुनाव जीत चुके हैं और दिल्ली चुनाव उनके लिए 42वां असाइनमेंट था। अगर बीजेपी हारी तो पार्टी के सबसे बड़े रणनीतिकार और अध्यक्ष होने की दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे शाह को इसकी जिम्मेदारी लेनी ही होगी।
4 दिल्ली चुनाव के नतीजों का सीधा असर
जम्मू-
कश्मीर में बनने वाली नई सरकार पर होगा। अगर बीजेपी हारी तो उसकी पीडीपी के साथ मोलभाव करने की हैसियत पर असर पड़ेगा। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि इस साल बिहार और उसके बाद पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के मनोबल पर दिल्ली चुनाव के नतीजों का असर पड़ने वाला है।
5 बीजेपी विरोधी पार्टियों को एक नई लाइफलाइन मिलेगी, जो उन्हें फिर से पार्टी के खिलाफ एकजुट होने में मदद करेगी। यह भी हो सकता है कि बीजेपी के सामने खुद को असहाय महसूस कर रही क्षेत्रीय पार्टियां मसलन-तृणमूल, सपा, बसपा, जेडीयू, आरजेडी को आप के रूप में एक लीडर मिल जाए। बता दें कि तृणमूल और जेडीयू ने तो दिल्ली चुनाव में आप को समर्थन किया था।