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  • अरविंद की ए टीम में मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, आशुतोष, योगेंद्र यादव, कुमार विश्‍वास, आश

ये हैं AAP को 67 सीटें जिताने वाले अहम चेहरे: कुछ जाने, कुछ गुमनाम

6 वर्ष पहले
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दिल्‍ली में आम आदमी पार्टी (आप) की जैसी जीत हुई है, वैसी अब तक किसी चुनाव में किसी की नहीं हुई। पार्टी का मुखिया होने के नाते इस जीत का क्रेडिट अरविंद केजरीवाल को जाता है। लेकिन असल में इस जीत के पीछे कई चेहरे और दस बड़े कारण भी काम कर रहे थे।
अरविंद की ए टीम तो जीत के लिए जीतोड़ मेहनत कर ही रही थी, इसके अलावा कई ऐसे लोग पर्दे के पीछे काम कर रहे थे। अरविंद की ए टीम में उनके साथ मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, आशुतोष, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास (युवाओं के बीच अपनी कविता और प्रचार के खास स्टाइल के लिए मशूहर), आशीष खेतान, सांसद भगवंत मान और गुल पनाग (स्टार प्रचारक) जैसे लोग थे।
जो चेहरे गुमनाम रह कर काम कर रहे थे, उनमें राघव चड्ढा, अंकित लाल, आशीष तलवार, नागेंद्र शर्मा, दीपक वाजपेयी, दुर्गेश पाठक, दिलीप पांडे, आतिशी मरलेना, पंकज गुप्‍ता, गुल पनाग शामिल हैं।
राघव चड्ढा (30 साल): सीए हैं। पार्टी के लिए चंदा जुटाने और हिसाब-किताब रखने में माहिर। आर्ट ऑक्‍शन और डिनर के जरिए चंदा जुटाने का आइडिया उन्‍हीं का था। भाजपा नेताओं पर कुछ कंपनियों के साथ हितों के टकराव संबंधी आरोप लगाने के पीछे की गई रिसर्च भी चड्ढा की ही थी।
संजय सिंह (42 साल): अन्‍ना आंदोलन के कार्यकर्ता। यूपी के संजय सिंह पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति के सक्रिय सदस्‍य हैं। उम्‍मीदवार चुनने में इनकी भूमिका अहम रही है।
अंकित लाल (30): सोशल मीडिया पर आप की सक्रियता और चर्चा बनाए रखने के पीछे अंकित की मेहनत है। वह अन्‍ना आंदोलन के समय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ कर इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शन (आईएसी) का सोशल मीडिया कैंपेन हैंडल करने आए थे। ट्विटर पर 'मफलरमैन' को लगातार कई दिनों तक ट्रेंड कराने का मामला हो या 'देल्‍ही डायलॉग' कैंपेन को प्रमोट करने का, अंकित की टीम इसमें पूरी तरह सफल रही।

आशीष खेतान (38 साल): आप के 'देल्‍ही डायलॉग' कैंपेन के पीछे आशीष खेतान की ही मेहनत थी। एपल के पूर्व इग्‍जेक्‍युटिव आदर्श शास्‍त्री के साथ मिल कर उन्‍होंने इस कैंपेन को चर्चित बनाया। खोजी पत्रकार रहे आशीष ने नई दिल्‍ली सीट से लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। आप को विकास, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लोगों के साथ जोड़ने में आशीष ने अहम भूमिका निभाई।
आशीष तलवार (45): पार्टी की रणनीति तय करने वाला मेन दिमाग। कभी कांग्रेस की छात्र इकाई में हुआ करते थे। उस दौरान गलियों की काफी खाक छानी है। दिल्‍ली की गलियों और कॉलोनियों को अच्‍छी तरह जानते-समझते हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव के समय वह आप में आए थे।
नगेंद्र शर्मा (42), दीपक वाजपेयी (42)
इन दोनों पत्रकारों ने 2013 के विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले ही आप ज्वाइन की थी। इनको मीडिया हैंडल करने का काम दिया गया। पार्टी के सामने ‘भगोड़े’ की छवि से लड़ने की चुनौती थी। पार्टी के पुराने समर्थकों द्वारा आप पर हवाला द्वारा फंड इकट्ठा करने के आरोप लगे। इन सब मौकों पर दोनों पार्टी का संदेश लोगों तक पहुंचाने में कामयाब रहे।
दुर्गेश पाठक (26), दिलीप पांडे (38)
दुर्गेश पाठक सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे थे। वह अन्ना आंदोलन के समय ही केजरीवाल की टीम में आए थे। दिलीप पांडे ने हांगकांग में अपनी आईटी जॉब छोड़ कर घर-घर प्रचार किया और आप के समर्थन में जनमत तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाई। दोनों को 2013 विधानसभा चुनाव के बाद से गुरिल्ला स्टाइल के कैंपेन में महारत हासिल हो गई। इनके प्रचार के स्टाइल से कई बार पुलिस और प्रशासन भी चौंक गया।
आशुतोष (44)
पूर्व पत्रकार आशुतोष जहां आप के दिल्ली प्रभारी हैं वहीं दिल्ली इलेक्शन कैंपेन कमेटी के भी सदस्य थे। वह आप उम्मीदवार के तौर पर चांदनी चौक से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। आशुतोष ने जबसे पार्टी ज्वाइन की है, आप के सबसे मुखर चेहरों में उभर कर सामने आए हैं खासकर पिछले कुछ महीनों में यह संदेश प्रचारित करने में उन्होंने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है कि आम आदमी पार्टी लंबी रेस का घोड़ा है।
मनीष सिसौदिया (43)
पूर्व टीवी पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट केजरीवाल के सबसे पुराने सहयोगियों में से एक हैं। वह पार्टी के सभी फैसलों में शामिल होते हैं। उन्होंने पिछला विधानसभा चुनाव जीता था। आप सरकार में वह शिक्षा और पीडब्ल्यूडी मंत्री भी रहे। इस बार उन्हें आप के बागी बिनोद कुमार बिन्नी से चुनौती मिली लेकिन सिसौदिया ने बिन्नी को आसानी से मात दे दी।
आतिशी मार्लेना (33)
आतिशी मार्क्सवादी की बेटी हैं। वह अपने नाम के बारे में बताती हैं कि उनका सरनेम मार्क्स और लेनिन के नाम जोड़कर रखा गया था। आतिशी ने लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी ज्वाइन की थी। उन्होंने पार्टी के लोकसभा चुनाव और फिर 2015 विधानसभा सभा चुनाव के घोषणा पत्र तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। सेंट स्टीफंस और ऑक्सफोर्ड के बैकग्राउंड और भारत के गांवों में किए गए उनके काम ने उन्हें काफी मदद मिली। वह टीवी पर डिबेट में पार्टी का एक प्रमुख चेहरा बन गईं।
योगेंद्र यादव (51)
चुनाव विश्लेषक, लेखक और अब नेता बने योगेंद्र यादव पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। वह पार्टी के दर्जन भर प्रवक्ताओं को दिशानिर्देश देते हैं कि मीडिया स्‍ट्रैटजी क्‍या हो। प्रशासन और नीतियों की उनकी गहरी समझ पार्टी के बहुत काम आई है। वह पार्टी के इंटर्नल सर्वे के लिए भी जिम्मेदार हैं।
पंकज गुप्ता (48)
पंकज गुप्ता सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में 25 साल काट चुके हैं। वह पार्टी के लिए फंड जुटाने का काम देखते हैं। पार्टी ने 2013 चुनाव के लिए 20 करोड़ रुपए इकट्ठा किए थे। इस चुनाव के लिए पार्टी सिर्फ 18 करोड़ ही जमा कर सकी जबकि उसका लक्ष्य 30 करोड़ का था।
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