नई दिल्ली. डिब्बा बंद सामान में धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों के खिलाफ खाद्य आपूर्ति विभाग ने नकेल कसने की तैयारी की है। कंपनियों को अल्टीमेटम दिया गया है कि या तो वह अपने पैकेट पर सामान से संबंधित सारी सूचनाएं स्पष्ट लिखें, जिससे उपभोक्ता खरीददारी के समय डिब्बे के अंदर क्या माल है और उसकी गुणवत्ता कैसी है? इसे जान सकें। इसके अलावा वस्तु निर्माण कंपनी अपने पते, फोन नंबर और ईमेल को भी डिब्बे पर अंकित करे। जिससे उपभोक्ता डिब्बे पर लिखे गुणवत्ता से संतुष्ट न होने पर कंपनी में शिकायत कर सके। अगर वस्तु निर्माता कंपनियां ऐसा नहीं करेंगी तो उनके खिलाफ दिल्ली का खाद्य एवं आपूर्ति विभाग कार्यवाही करेगा।
खाद्य एवं आपूर्ति आयुक्त सज्जन सिंह यादव ने सोमवार को बताया कि दिल्ली लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट 2009 और डिब्बाबंद वस्तु नियम 2011 के रूप में पहले से पैक डिब्बा बंद वस्तुओं की बिक्री में उपभोक्ता को धोखाधड़ी से बचाने के प्रावधान किए गए हैं। इन्हीं प्रावधानों को लागू कराने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए यह अभियान शुरू किय गया है। यादव ने बताया कि यह नियम उपभोक्ताओं को शिकायत करने का अवसर भी देता है। हर पैकेट या डिब्बे पर निर्माता कंपनी का पता, फोन नंबर और ईमेल लिखा होने से उपभोक्ता के लिए ऐसा करना आसान होगा।
देखने में यह भी आया है कि कुछ व्यापारी डिब्बे पर संशोधित मूल्य का स्टीकर चिपकाकर सामान बेचते हैं, यह तभी संभव है जब एमआरपी कम किया गया हो। अब डिब्बा बंद वस्तु का निर्माण करने वाली कंपनी, खाद्य सामग्री का वजन, उसकी शुद्धता का पैमाना, उसके उपभोग का तरीका व निर्माण और एक्सपायरी डेट की डिटेल अंकित करना जरूरी होगा।
यादव ने बताया कि शिकायतें मिलने पर माप तौल विभाग ने एक विशेष अभियान चलाया, इसमें अब तक 1740 व्यापारियों पर मुकदमा चलाया गया है।
नियमों का उल्लंघन करने वालों से एकत्र राशि में वृद्धि हुई है। जो पिछले साल 33.7 लाख रुपये से बढ़ कर पांच माह में 59.33 लाख रुपए हो गई। नियमानुसार दोषी पाए जाने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना और दोबारा दोषी पाए जाने पर जुर्माने के साथ एक साल कारावास की सजा है। उपभोक्ता अपनी शिकायत मापतौल विभाग के 011-23379267 और 011-23370654 पर दर्ज करा सकता है।