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पूर्व विधायकों ने फिर मारी बाजी, दलबदलुओं को जनता ने नकारा

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. विधानसभा चुनाव में उतरे आम आदमी पार्टी के सभी 21 पूर्व विधायकों ने एक बार फिर चुनावी दंगल में बाजी मारी है। हालांकि पार्टी के 4 बागी उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी के इन सभी विधायकों ने पूर्व की अपेक्षा ज्यादा मतों से अपने विरोधियों को शिकस्त दी है।
जिन विधायकों ने दोबारा दर्ज की जीत
नई दिल्ली से अरविंद केजरीवाल और शेष पूर्व छह मंत्रियों के अलावा तिलक नगर से जरनैल सिंह, त्रिलोकपुरी से राजू, संगम विहार से दिनेश मोहनिया, मॉडल टाउन से अखिलेश त्रिपाठी, कस्तूरबा नगर से मदन लाल, देवली से प्रकाश, हरि नगर जगदीप राणा, करोलबाग से विशेष रवि, सदर बाजार से सोमदत्त, कोंडली से मनोज कुमार, दिल्ली कैंट से सुरेन्द्र सिंह, बुराड़ी से संजीव झा, शालीमार बाग से वंदना कुमारी, विकास पुरी से महेन्द्र यादव ने जीत हासिल की है। इनके अलावा पार्टी के सभी पूर्व मंत्रियों ने भी जीता है।
दलबदलुओं को जनता ने नकारा
दिल्ली की जनता ने दल-बदलुओं को पूरी तरह से नकार दिया है। आप के बागी उम्मीदवारों को भी शिकस्त खानी पड़ी है। पार्टी के आधे दर्जन बागी उम्मीदवारों को दिल्लीवालों ने हार का स्वाद चखाया है। इनमें साल भर पहले आप से बगावत करने वाले विनोद कुमार बिन्नी को पटपड़गंज से आप के मनीष सिसोदिया ने भारी मतों से पटखनी दी है। इनके अलावा जंगपुरा से चुनाव के ऐन मौके पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एमएस धीर का भाजपा से चुनाव लडऩा जनता को रास नहीं आया और इन्हें भी हार मिली।
इसी तरह अंबेडकर नगर से आप छोड़ भाजपा से चुनाव लडऩे वाले अशोक कुमार चौहान को भी हार का स्वाद मिला। पटेल नगर से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लडऩे वाली आप की पूर्व विधायक वीणा आनंद को भी हार का सामना करना पड़ा है।
चुनाव के ऐन मौके पर भाजपा अथवा कांग्रेस में शामिल होने वाले दलबदलुओं को भी जनता ने नहीं बख्शा। पूर्व केन्द्रीय मंत्री और सांसद रह चुकीं कांग्रेस की नेता कृष्णा तीरथ टिकट न मिलने से नाराज होकर भाजपा का दामन थामा और पटेल नगर से चुनाव लड़ा, लेकिन असफल रहीं। इसी तरह पांच बार विधायक रह चुके मटियामहल से कांग्रेस प्रत्याशी शोएब इकबाल भी चुनाव हार गए। शोएब इकबाल चुनाव के ऐन मौके पर जनता दल यूनाइटेड छोड़कर कांग्रेस के रथ पर सवार हो गए थे। पिछले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मुंडका से जीतने वाले रामबीर शौकीन की पत्नी रीता शौकीन को भी इस बार मुंडका की जनता ने नकार दिया है।
लोकसभा में हारे यहां जीते
आम आदमी पार्टी के तीन प्रत्याशी ऐसे भी हैं, जो लोकसभा चुनाव में तो हार गए, लेकिन विधानसभा में जीत हासिल की है। इनमें दक्षिणी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले कर्नल देवेन्द्र सहरावत ने बिजवासन विधानसभा क्षेत्र से सफल हुए हैं।
इसी तरह पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से चुनाव हारने वाले आप प्रत्याशी और पूर्व पत्रकार जरनैल सिंह ने राजौरी गार्डन विधानसभा क्षेत्र से फतह की है। पूर्व मंत्री और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लडऩे वाली राखी बिड़लान ने मंगोलपुरी से चुनाव जीता है। हालांकि राखी बिड़लान पूर्व में भी आप की विधायक रह चुकी हैं।
नई दिल्ली में अंतिम राउंड तक विरोधियों पर भारी पड़े अरविंद केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को नई दिल्ली के सभी इलाकों के लोगों ने दिल खोलकर वोट दिया है। फलस्वरूप केजरीवाल अपने सभी 16 राउंड की मतगणना में अपने विरोधियों पर भारी पड़े। केजरीवाल ने पूर्व की अपेक्षा इस बार अपने प्रतिद्वंदी को ज्यादा मतों से पटखनी दी है। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को 25 हजार 864 वोटों से हराया था और इस बार अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा की नुपूर शर्मा को 31 हजार 583 वोटों से शिकस्त दी। पहले राउंड में ही केजरीवाल भाजपा प्रत्याशी से तीन गुना से ज्यादा मतों से आगे हो गए, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी से 16 गुना ज्यादा वोट मिला। यह सिलसिला 16वें राउंड तक जारी रहा।
रोचक बात यह है कि सभी राउंड में केजरीवाल लगातार आगे होते रहे। नई दिल्ली में डाले गए कुल 88,225 वोटों में से 56,673 वोट अरविंद केजरीवाल को मिले, जबकि भाजपा की नुपूर शर्मा को 25,277 वोटों और कांग्रेस की किरण वालिया को मात्र 4708 वोट से ही संतोष करना पड़ा। केजरीवाल को भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों को मिले कुल मतों से लगभग दोगुना ज्यादा मत मिले।