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सोना अगले साल तक हो सकता है 20 हजारी, एबीएन एमरो का अनुमान

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. आने वाले समय में सोना और सस्ता हो सकता है। वजह है डॉलर में मजबूती। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार के कारण डॉलर अन्य करेंसी के मुकाबले लगातार मजबूत हो रहा है। विश्व बाजार में सोना अभी साढ़े चार साल के निचले स्तर 1137.40 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा है। वित्तीय सेवा कंपनी एबीएन एमरो के मुताबिक साल के अंत तक यह 1100 डॉलर के स्तर से नीचे आ जाएगा। साल 2015 के अंत तक 800 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच जाएगा। इसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखेगा। अगर विदेशी बाजारों में भाव 1100 डॉलर के नीचे आया तो यहां इसकी कीमत 24-25 हजार रुपए प्रति दस ग्राम के बीच रहेगी।
अंतरराष्ट्रीय कीमत 800 डॉलर होने की स्थिति में यहां यह 20 हजार रुपए तक गिर सकती है। बुधवार को घरेलू बाजारों में सोना 39 महीने बाद 26,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे आ गया था। शादियों का सीजन शुरू होने के बावजूद यहां सोने-चांदी की कीमतें दबाव में हैं। दीपावली के दिन सोने की कीमत 27,850 रुपए प्रति दस ग्राम थी।
एक पखवाड़े में यह 1,950 रुपए टूटकर 25,900 पर आ गई है। चांदी भी इस दौरान 38,900 रुपए से घटकर 35,050 रुपए पर आ गई। यानी 15 दिन में सोना 7 फीसदी और चांदी 9.8 फीसदी टूट गई।
भारत की स्थिति
सोने की खपत के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है। दाम घटने पर भी यहां डिमांड कम। सबसे ज्यादा खपत करने वाले चीन में भी यही हाल।
चालू खाता घाटा कम करने के लिए भारत ने सोने के आयात पर कई बंदिशें लगा रखी हैं। इससे आयात काफी कम हो गया है। यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की तरफ से भी मांग कम है।
भारत में सालाना औसतन 900 टन सोने की खपत होती है। साल 2020 तक इसके 1200 टन तक पहुंचने का अनुमान है।
सोने की घटती वैश्विक मांग
2012 4,585.2
2013 4,065.5
2014 2052.2
(6 माह में)
(मात्रा टन में, स्रोत – वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल)
2014 के पहले छह माह में सोने की वैश्विक मांग 2052.2 टन रही है। पिछले साल की पहली छमाही से यह 160 टन यानी 7.2 फीसदी कम है।