दिल्ली/रायपुर. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्यों को अपना वार्षिक लक्ष्य स्वयं तक करने की स्वतंत्रता देने की वकालत की है। उन्होंने केंद्र सरकार से विभिन्न योजनाओं के तहत राज्य को मिलने वाले टाइट फंड के बदले अनटाइड फंड देने की बात कही। साथ ही अनटाइड फंड के तहत राज्यों को और अधिक अधिकार दिए जाने की मांग की। डॉ. सिंह ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में संचालित अच्छी योजनाओं को अन्य राज्यों में लागू करना चाहिए। ऐसी योजनाएं जिनका परिणाम अच्छा नहीं रहा है, उन्हें तत्काल बंद कर देना चाहिए।
डॉ. सिंह ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की शासी-परिषद की प्रथम बैठक में राज्य सरकार की ओर यह सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि अनटाइड फंड के अंतर्गत केन्द्र की योजनाओं को राज्य में लागू करने के लिए राज्यों को उसमें अपनी परिस्थिति व मापदंडों में बदलाव लाने की छूट मिलनी चाहिए। उन्होंने राज्यों को विकास योजनाओं पर और अधिक राशि उपलब्ध कराए जाने का भी नीति आयोग से आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि नीति आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया जाए। नीति आयोग को संवैधानिक दर्जा देकर अंतरराज्यीय परिषद को भी और अधिक सशक्त बनाना चाहिए। डॉ. रमन सिंह ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ नया राज्य है, जहां कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं पीपीपी मॉडल पर संचालित की जा रही है।
अतः ऐसी योजनाओं पर नीति आयोग छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को तकनीकी परामर्श व विशेषज्ञों की सुविधाएं उपलब्ध कराए। इसके लिए उन्होंने नॉलेज हब बनाने का सुझाव रखा।
इस नॉलेज हब में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विशेषज्ञ सदस्य होना चाहिए। यह संस्थान नीति प्रयोगशाला की भूमिका में कार्य करें तथा केन्द्र तथा राज्य सरकारों को नीति निर्धारण, संसाधन जुटाने और नियोजन प्रक्रिया में सलाह दे। इसे नीति निर्धारकों तथा शिक्षाविदों और अनुसंधानकर्त्ताओं के बीच सेतु की भूमिका निभानी चाहिए।
पीएम से मिले सीएम
मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने बैठक के बाद प्रधानमंत्री से अलग से मुलाकात भी की। 20 मिनट की इस मुलाकात में राज्य में संचालित योजनाओं जैसे सड़क, रेल परियोजनाओं आदि विषयों पर चर्चा हुई। साथ ही प्रदेश में नक्सलवाद के मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।