नई दिल्ली. विश्व बैंक के अनुमानों से दो साल पहले ही भारत ने चीन को पछाड़ दिया है। सोमवार को जारी विकास दर के आंकड़ों में अक्टूबर-दिसंबर यानी तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5% रही। जबकि इस तिमाही में चीन की ग्रोथ रेट 7.3% दर्ज की गई। साथ ही, इस पूरे वित्त वर्ष के लिए विकास दर 7.4% रहने की उम्मीद जताई गई है। लेकिन विशेषज्ञों ने आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। दरअसल, ये आंकड़े नए बेस ईयर 2011-12 के आधार पर आए हैं। पुराने बेस ईयर (2004-05) के हिसाब से तो जीडीपी ग्रोथ रेट 5.5% ही है।
ये हुए दो बदलाव
1. बेस ईयर : यह हर पांच साल में बदलता है। इससे पहले 2010 में बदला था। इसे इसलिए बदला जाता है, ताकि आंकड़े मौजूदा वास्तविक मूल्य के करीब हों। चीन में भी हर पांच साल में बेस ईयर बदला जाता है। मौजूदा बेस ईयर 2005 का है।
2. फैक्टर कॉस्ट के बदले मार्केट प्राइस : पहले जीडीपी फैक्टर कॉस्ट के आधार पर आंकी जाती थी। अब मार्केट प्राइस के आधार पर आंकी जा रही है। किसी वस्तु को बनाने में जो लागत आती है (कंपनी के मार्जिन समेत) वह फैक्टर कॉस्ट होती है। जबकि टैक्स आदि जोड़ने के बाद की कीमत मार्केट प्राइस होती है।
ज्यादातर सेक्टर 7% के ऊपर (आंकड़े सीएसओ के मुताबिक)
वित्तीय सेवाओं, रियलिटी, ट्रेड, ट्रांसपोर्ट, बिजली, गैस समेत कई सेक्टरों में विकास दर 7% से ज्यादा रही है।
खेती की ग्रोथ रेट सबसे कम 1.1%, खनन की 2.3%, कंस्ट्रक्शन की 4.5%और मैन्युफैक्चरिंग की 6.8% रही।
न निवेश बढ़ा, न मांग फिर ग्रोथ कैसे?
कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद न तो नया निवेश बढ़ रहा है और न ही मांग। फिर ये ग्रोथ कैसे हो सकती है। - एसोचैम, उद्योग संघ
हमें नए आंकड़ों को समझने की जरूरत है। पुराने आधार पर इस साल ग्रोथ रेट 5.5% रह सकती है। - रघुराम राजन, आरबीआई गवर्नर
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(नोट - सभी फोटो का उपयोग प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।)