नई दिल्ली.जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जल्द ही दिल्ली आईआईटी और डीयू के साथ करार करने जा रहा है ताकि बिना दाखिला लिए इन शिक्षण संस्थानों कक्षाओं में बैठकर अध्ययन कर सकें। इसके साथ ही मेटा यूनिवर्सिटी का कॉन्सेप्ट भी पूरा हो सकेगा। जेएनयू के कुलपति प्रो. सुधीर कुमार सोपोरी ने कहा कि मेटा का मतलब ही कोई दीवार नहीं। इस समझौते के बाद विश्वविद्यालयों की चार दीवारी से निकलकर विद्यार्थी किसी भी आईआईटी और विश्वविद्यालय के कॉलेजों में जाकर ज्ञानार्जन कर सकेंगे। इस बारे में जेएनयू ने एक कमेटी का भी गठन किया है।
प्रो. सोपोरी बताते हैं कि दरअसल आईआईटी दिल्ली के साथ लंबे समय से विचार-विमर्श चल रहा है। हमने स्टाफ काउंसिल में यह मसला रखा और प्राध्यापकों के बीच भी इस पहलू पर विचार-विमर्श हुआ। यह सामने आया कि इस करार से जेएनयू के छात्रों को तकनीकी ज्ञान मिलेगा तो आईआईटी के छात्रों को सोशल साइंस कोर्सो का फायदा मिलेगा। क्योंकि आईआईटी दिल्ली के तकनीकी रूप से मजबूत छात्र सोशल साइंस विषय में कमजोर हैं। इस बारे में आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. आरके शेवगांवकर बताते हैं कि हम जेएनयू के साथ करार करने के लिए उत्सुक हैं।
यह करार नए सत्र में हो जाएगा। जिससे छात्रों को जल्द ही आईआईटी और जेएनयू के बीच की बाउंड्री को पार करने का मौका मिलेगा। वहां पढ़ाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय राजनीति, सोशल साइंस, मानव व्यवहार से छात्रों में आर्ट्स के विषयों का ज्ञान बढ़ेगा और वह तकनीक ज्ञान के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। क्योंकि आईआईटी का उद्देश्य मशीन मैन का निर्माण करना नहीं बल्कि कौशल दक्षता के साथ-साथ सामाजिक नागरिक का निर्माण करना भी है।
डीयू, जामिया के बाद जेएनयू की पहल से क्या होगा बदलाव
जामिया और डीयू मेटा यूनिवर्सिटी की दिशा में पहले ही करार कर चुके हैं और दोनों विश्वविद्यालयों के बीच इस वर्ष कोर्स भी शुरू किया गया है। जेएनयू के करार के बाद वह दिन दूर नहीं होगा, जब एक पाठ्यक्रम के लिए दो विश्वविद्यालय की बजाए तीन विश्वविद्यालय और दिल्ली आईआईटी में छात्रों को अध्ययन का मौका मिलेगा।
केन्द्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को जामिया और डीयू पहले ही अमली जामा पहना चुके हैं। जिसके तहत मास्टर्स इन मैथमेटिकल एजुकेशन नामक दो वर्षीय पाठ्यक्रम डीयू ने शुरू किया है। जिसे दोनों विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से पढ़ाएंगे। डीयू के क्लस्टर इन इनोवेशन सेंटर में यह पाठ्यक्रम चल रहा है। जबकि जामिया में डिपार्टमेंट ऑफ कन्वर्जन जर्नलिज्म में इसकी पढ़ाई होगी।