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JNU में फिर लहराया लाल झंडा, वामपंथियों का चारों सीटों पर कब्जा

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स यूनियन (आइसा) ने एक बार फिर चारों सीटों पर लाल झंडा गाड़ दिया है। विश्वविद्यालय के अध्यक्ष पद पर आइसा के आशुतोष कुमार, उपाध्यक्ष पद पर अनंत प्रकाश नारायण, महासचिव पद पर चिंतू कुमारी और संयुक्त सचिव पद पर शफाकत हुसैन ने जीत हासिल की है। आइसा ने लगातार दूसरी बार सभी महत्वपूर्ण पदों पर जीत हासिल की है। हालांकि जेएनयू छात्र संघ चुनाव में पहली बार एबीवीपी ने भी बड़े पैमाने पर उछाल मारते हुए दो महत्वपूर्ण पदों पर दूसरे पायदान पर पहुंच गई। एबीवीपी के वोट बैंक में पहले की अपेक्षा दो गुना इजाफा हुआ है।
आइसा के अलावा चुनाव मैदान में कई अन्य वामपंथी संगठन, एनएसयूआई और एबीवीपी के भी पदाधिकारी थे। अध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने वाले आशुतोष कुमार को 1386 वोट प्राप्त हुए और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी रहिला परवीन को 377 मतों से पराजित किया। राहिला परवीन लेफ्ट प्रोग्रेसिव फ्रंट (एलपीएफ) की तरफ से अध्यक्ष पद की उम्मीदवार थीं। यह फ्रंट डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन और आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का संयुक्त गठबंधन था।
इसी तरह उपाध्यक्ष पद पर कब्जा करने वाले अनंत प्रकाश ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी एबीवीपी के मो. जाहिदुल दीवान को 600 मतों से हराया। आइसा की चिंटू कुमारी ने एबीवीपी के आशीष कुमार धनोतिया को 814 मतों से हराकर महासचिव पद पर कब्जा कर लिया। शफाकत हुसैन ने एलपीएफ के उम्मीदवार मुलायम सिंह को 240 मतों से पटखनी देते हुए जीत हासिल की। चुनाव जीतने के बाद जेएनयू के नए अध्यक्ष आशुतोष कुमार ने कहा है कि हमें पूर्ण जनादेश मिला है और यह देश में फॉसिस्ट ताकतों को करारा जवाब है।
जेएनयू में 12 सितंबर को हुए छात्र संघ चुनाव में 54 फीसदी छात्रों ने अपने मतों का उपयोग किया। छात्र संगठनों ने इस बार के चुनाव में महिलाओं की सुरक्षा और छात्रावास सुविधाओं को महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया था। इस चुनाव में दृष्टिहीन छात्रों के लिए डिजिटल वोटिंग की भी सुविधा का इंतजाम किया गया। छात्र संघ चुनाव में पहली बार नोटा (कोई नहीं पसंद) के उपयोग करने की भी सुविधा दी गई और 300 छात्र-छात्राओं ने नोटा के बटन को दबाया, जिन्होंने सेंट्रल पैनल की चार में से तीन सीटों पर नोटा का इस्तेमाल किया।
अध्यक्ष पद के उम्मीदवार
आइसा के आशुतोष कुमार, एसएफआई से पिनडीगा अंबेडकर, एलपीएफ से राहिला परवीन, एबीवीपी से सौरभ कुमार, एनएसयूआई के जोगेंद्र सिंह पवार और चंद्रशेखर यादव व प्रकाश कुमार ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अध्यक्ष पद के लिए भाग्य आजमाया। इसके अलावा उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव के लिए पांच-पांच उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। मजे की बात यह है कि वामपंथियों का गढ़ कहे जाने वाले जेएनयू में एबीवीपी के दो उम्मीदवार उपाध्यक्ष और महासचिव पद पर दूसरे पायदान पर रहे।
जेएनयू के 11 काउंसलर पद पर एबीवीपी को मिली सफलता
जेएनयू छात्र संघ चुनाव में हुए 31 काउंसलर पदों में से 11 पदों पर एबीवीपी ने जीत हासिल की है, जिसे एबीवीपी के लिए एक अहम सफलता बताया जा रहा है। इसके अलावा एक काउंसलर ने एबीवीपी का समर्थन किया है। संस्कृत सेंटर के काउंसलर के लिए एबीवीपी के ओम प्रकाश, फिजिकल साइंस के लिए अनुराधा राजपूत, आईटी सेंटर के लिए वसु मित्तल, स्कूल ऑफ लैंग्वेज के लिए मुकेश कुमार के अलावा लाइफ साइंस के लिए दो, एन्वायरमेंटल साइंस के लिए दो और कम्प्यूटर साइंस के काउंसलर पद पर तीन प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। इसके अलावा बायोटेक्नॉलॉजी सेंटर के लिए अभिषेक कुमार पांडेय ने जीत दर्ज की है और एबीवीपी को समर्थन दिया है।
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