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Delhi LIVE: कैसे AAP की लहर बनी सुनामी, किसने क्या खोया और क्या पाया

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। पार्टी को 67 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई है। दिल्ली में 2013 तक 15 सालों से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला। बची हुई तीन सीटें बीजेपी के खाते में गई हैं। यह नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी की सबसे बड़ी हार है। बीते 13 सालों में इस जोड़ी ने एक भी चुनाव नहीं हारा था। शाह अब तक करीब तीन दर्जन चुनाव मैनेज कर चुके हैं और सबमें जीतते रहे थे। अब केजरीवाल ठीक एक साल बाद 14 फरवरी को शपथ लेकर दिल्ली की सत्ता पर काबिज होंगे।
दिल्ली चुनाव: सबसे बड़े गेनर
अरविंद केजरीवाल: आम आदमी पार्टी यानी ‘आप’ का प्रमुख चेहरा हैं। 2013 के दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस और शीला दीक्षित को करारी शिकस्त देते हुए 28 सीटें हासिल कीं। 49 दिन की सरकार बनाई और अब भाजपा को करारी मात दी। दिल्ली में तो कांग्रेस का एक तरह से खात्मा ही हो गया। जानकार मानते हैं कि केजरीवाल अब देश की राजनीति में एक नया केंद्र बनकर उभरेंगे। मोदी और अमित शाह की जोड़ी को फेल करने वाले केजरीवाल के हर नए कदम पर अब देश और दुनिया की नजर रहेगी।
कुमार विश्वास: आम आदमी पार्टी यानी ‘आप’ का युवाओं में सबसे लोकप्रिय कवि चेहरा। अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा लेकिन जमानत जब्त हो गई। योगेंद्र यादव ने माना है कि बीजेपी ने जब केजरीवाल के खिलाफ किरण बेदी को उतारा तो ‘आप’ परेशान थी और ऐसे वक्त में कुमार विश्वास ने बेदी को उनके ही पुराने ट्वीट से घेरा और इसके बाद उन्होंने ही बेदी और मोदी पर करारे प्रहार किए। ‘आप’नेता भी मानते हैं कि एक वक्ता के तौर पर विश्वास का कोई जवाब नहीं है।
अलका लांबा: कांग्रेस से ‘आप’ में शामिल हुईं। उनको शाजिया इल्मी और किरण बेदी के साथ ही नुपुर शर्मा का भी जवाब माना गया। अलका ने माना है कि राजनीति में उनका यह नया जीवन है क्योंकि वह कांग्रेस में कुंठित और उपेक्षित महसूस कर रही थीं। केजरीवाल के सलाहकारों में अलका की बड़ी भूमिका है उनको महिलाओं से जुड़े मुद्दों के साथ ही दिल्ली की जमीनी हकीकत की बेहतरीन जानकारी है।
....और ये रहे सबसे बड़े लूजर
नरेंद्र मोदी: केजरीवाल पर व्यक्तिगत हमला करके मोदी ने खुद ही दिल्ली चुनाव को ‘केजरीवाल बनाम मोदी’ बना दिया। दिल्ली में बीजेपी की हार बहुत हद तक मोदी की भी हार है क्योंकि दिल्ली को देश का दिल कहा जाता है। उनकी और अमित शाह की जोड़ी ने पहले लोकसभा और फिर कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की लेकिन दिल्ली की तस्वीर को बदलने में बुरी तरह फेल रहे। अब विपक्ष मोदी के खिलाफ एकजुट भी हो सकता है और मुखर भी।
अमित शाह: कुछ महीने पहले तक कहा जा रहा था कि अमित शाह के चक्रव्यूह को भेद पाना फिलहाल किसी के लिए संभव नहीं लेकिन दिल्ली में ‘आप’ने बीजेपी के इस चाणक्य को मात दे दी। शाह के सामने इसी साल के अंत में बिहार और अगले साल पश्चिम बंगाल की चुनौतियां हैं। हो सकता है पार्टी में उनके खिलाफ आवाजें भी उठने लगें। सबसे बड़ी दिक्कत तो ये है कि अब विपक्ष एकजुट होकर उन्हें चुनौति दे सकता है। अमित शाह के लिए अब परीक्षाओं का नया दौर शुरू हो चुका है।
किरण बेदी: बीजेपी ने केजरीवाल के मुकाबले किरण बेदी को उतारकर मास्टर स्ट्रोक खेला लेकिन देश की इस पहली महिला पूर्व आईपीएस अधिकारी को अपने पूर्व सहयोगी के खिलाफ सियासत में करारी मात मिली। अब देखना यह होगा कि बीजेपी और किरण बेदी का अगला कदम क्या होगा? क्या किरण बेदी के लिए बीजेपी कोई नई भूमिका तलाशेगी या फिर खुद की सीट भी न बचाने वाली किरण खुद राजनीति से अलग हो जाएंगी।
राहुल गांधी: कांग्रेस के कुछ नेता उनको पार्टी का अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे हैं लेकिन दिल्ली में प्रचार की रणनीति उन्होंने ही बनाई और कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। अब सवाल है कि कांग्रेस और राहुल गांधी क्या करेंगे। कुछ कार्यकर्ता तो अभी से ही प्रियंका गांधी को लाने की मांग करने लगे हैं। सवाल यह भी है कि क्या कांग्रेस में राहुल और उनकी मां सोनिया के खिलाफ बगावत के स्वर और तेज होंगे, और अगर होते हैं तो राहुल एंड कंपनी उनसे कैसे निपटेगी।
अजय माकन: कांग्रेस का चुनावी चेहरा थे लेकिन खुद की सीट भी नहीं बचा पाए और पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका। 2013 के पहले दिल्ली पर 15 साल तक राज करने वाली कांग्रेस दिल्ली में कहीं नजर नहीं आ रही। इसका ठीकरा किस-किसके सिर फूटेगा यह तो नहीं मालूम लेकिन इतना तय है कि दिल्ली और कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में अजय माकन का कद बेहद छोटा हो जाएगा।
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